रायबरेली : शासन से निर्देश है कि किसानों से तौल कराने के बाद 72 घंटे के अंदर भुगतान करें। शुरूआत में तो स्थिति ठीक रही, लेकिन धीरे-धीरे व्यवस्था बेपटरी हो गई। किसानों का करीब 53 करोड़ रुपये का भुगतान क्रय एजेसियां दबाए बैठी हैं। अन्नदाता क्रय केंद्रों पर पहुंचते और भुगतान के लिए मिन्नतें करते, लेकिन उन्हें सिर्फ आश्वासन मिल रहा है। राइस मिलों से चावल उठान और भुगतान में आ रही दिक्कतों को दूर करने के लिए एडीएम प्रशासन ने एफसीआइ अफसरों को पत्र भेजा है।

जिले को एक लाख 30 हजार मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य दिया गया था। इसके लिए 79 क्रय केंद्र खोले गए थे। किसानों का धान भुगतान शुरूआत में तो ठीक रहा, लेकिन धीरे-धीरे इसमें देरी होने लगी। क्रय एजेंसियों के पास किसानों का पैसा फंसने लगा। अब तक करीब 32 हजार किसानों से धान खरीद की जा चुकी है। इनमें से काफी किसानों का 53 करोड़ रुपये का भुगतान क्रय एजेंसियां नहीं कर सकी। भुगतान में आ रही दिक्कतों के कारण ही 34 क्रय केंद्रों को प्रशासन ने बंद कर दिया। इस समस्या को दूर करने के लिए एडीएम प्रशासन ने एफसीआइ के एरिया मैनेजर को पत्र लिखकर चावल की उठान और भुगतान में आ रही दिक्कतों को दूर करने की बात कही।

नहीं उठ पा रहा चावल

क्रय केंद्रों पर तौल होने के बाद धान राइस मिलों में जाता है। वहां से चावल एफसीआइ पहुंचता और पावती पत्र मिलने के बाद भुगतान के लिए बिल जमा होते हैं। आलम यह है कि कई दिनों तक चावल से लदे ट्रक खड़े रहते हैं। ऐसे में समय से पावती न मिलने और बिल न लगने से भुगतान की प्रक्रिया काफी लंबी होती जा रही है।

इनकी सुनें,

चावल एफसीआइ ले नहीं पा रहा है। चावल रखने के लिए जगह नहीं है। पत्र लिखा गया है। जल्द ही सभी किसानों का भुगतान कराया जाएगा।

राम अभिलाष, एडीएम प्रशासन

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