बागेश्वर, जेएनएन : गैर हिमानी नदियों में सरयू को मोक्षदायिनी कहते हैं। यह नदी बागेश्वर में जब गोमती नदी से मिलती है तो यह स्थान कुमांऊ की काशी कहलाने लगती है। सरयू का उद्गम स्थल कई रहस्यों से भरा पड़ा है। यहां तक पहुंचने वाले लोग बरबस इसकी ओर आकर्षित होते हैं।

 

कपकोट ब्लॉक के झूनी ग्राम पंचायत में स्थित एक सुन्दर पहाड़ी से सदानीरा सरयू नदी का उद्गम होता है। यहां से छोटी-छोटी सौ धाराओं में निकलकर सरयू अविरल बहना शुरू करती है। सरयू के इस उद्गम स्थल को सरमूल कहा जाता है। सरमूल नंदा कोट पर्वत माला के 15 किमी दक्षिण में स्थत है। जिस स्थल पर मां सरयू धरती पर उतरती हैं उस जगह को 'सौधारा' कहते हैं।

 

यहां पर सरयू मैया का मंदिर बनाया गया है। यहाँ हर वर्ष वैशाखी पूर्णिमा का मेला लगता है। क्षेत्र के लोग यहाँ अपने पितरों के निमित्त श्राद्ध तर्पण हेतु आते हैं। सौ-धारा में लोग बच्चों के जनेऊ संस्कार भी कराते हैं। शिव पुराण में सहस्रधारा का वर्णन है।

 

विश्व प्रसिद्ध स्थल पर्यटकों से दूर

विश्व विख्यात पिंडारी ग्लेशियर मार्ग के पास होते हुए भी सदानीरा सरयू का यह उद्गम स्थल आज भी धार्मिक पर्यटकों की पहुँच से दूर है। क्षेत्र के लोग इस स्थल को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने में प्रयासरत हैं। इस संबंध में पर्यटन विभाग को भी जानकारी दी गई है। यह क्षेत्र ट्रैकिंग के रुप में विकसित करने पर कार्य भी चल रहा हैं। अगर ऐसा हो गया तो आने वाले समय में यह क्षेत्र पर्यटकों के लिए सबसे पसंदीदा जगह होगी।

 

सरयू नदी के उद्गम स्थल सरमूल तक यात्रा

यदि आप दिल्ली से आ रहे हैं तो नजदीकी रेलवे स्टेशन काठगोदाम है। यहाँ से आप सीधा भीमताल, भवाली, अल्मोड़ा, ताकुला, बागेश्वर होते हुए कपकोट तक आ सकते हैं। यहाँ के लिए आसानी से टैक्सी या केएमओयू की बसें उपलब्ध रहती हैं। हल्द्वानी से कपकोट (भराड़ी) या बागेश्वर तक टैक्सी भी उपलब्ध रहती हैं। कपकोट (भराड़ी) से सौंग, मुनार होते हुए आप तरसाल तक गाड़ी से जा सकते हैं। पैदल पतियासार, सूपी, तलाई के मनोहर दृश्यों को देखते हुए आपको झूनी गांव जाना होगा। यहीं झूनी गांव के पास ही एक सुन्दर पहाड़ी से सरयू का उद्गम होता है।

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