नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री शांता कुमार की आत्मकथा 'निज पथ का अविचल पंथी' का मंगलवार को कांस्टीट्यूशन क्लब में लोकार्पण हुआ। इस मौके पर पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने पुस्तक को एक सिद्धांतवादी व्यक्ति की आत्मकथा बताया। उन्होंने कहा कि शांता कुमार ने मूल धारा का सवाल उठाया है। यहां उन्होंने गंगा की अविरल धारा पर मंडरा रहे खतरे को लेकर भी आगाह करते हुए कहा है कि यदि गंगा लुप्त हुई तो भोजन और जल नहीं मिलेगा। उत्तराखंड में जो घटित हुआ है, वह संकेत करता है कि यदि मनुष्य अपनी धारा से विचलित होता है तो विनाश को न्योता देता है। प्रकृति और मानव का संबंध मां-बेटे जैसा है। इस सवाल का जवाब पूरी दुनिया ढूंढ रही है कि आखिर कहां से चले थे और कहां पहुंच गए। बाजार पर निर्भर नहीं रहा जा सकता। जब पूंजी से शांति नहीं मिल रही है तो हम क्यों उसके पीछे जा रहे हैं। जीवन पद्धति पर्यावरण केंद्रित होनी चाहिए। यदि उपभोग सीमित नहीं करेंगे तो आने वाली पीढ़ी के साथ अन्याय ही करेंगे।

दुनिया के सर्वाधिक खुश व्यक्तिों की सूची में मेरा नंबर पहला : शांता कुमार

शांता कुमार ने कहा, 'दोस्तों, पत्नी के कहने पर आत्मकथा लिखनी शुरू की। पत्नी संतोष ने दुबई में रह रही बेटी को फोन कर मेरी ही एक कविता के शीर्षक पर आत्मकथा का नाम रखा। आज धर्मपत्नी संतोष नहीं हैं, उनकी कमी खल रही है। आत्मकथा में मैंने बड़ी बेबाकी से सियासी घटनाओं का जिक्र किया है। इस बेबाकी के कारण कई दोस्तों को तकलीफ भी पहुंच सकती है, इसके लिए क्षमा चाहता हूं। इसमें वर्ष 1990 में एक लोकसभा और दो विधानसभा सीटों से जीतने के बाद परिवार द्वारा परिवारवाद को बढ़ावा ना देने की सलाह देने की घटना का भी वर्णन है। जयप्रकाश नारायण का भी जिक्र है। आपातकाल की घटनाओं का विस्तृत ब्यौरा है। मुझसे पार्टी को लेकर अक्सर सवाल पूछे जाते हैं, मैं सिर्फ इतना कहूंगा कि यदि दुनिया के सर्वाधिक खुश लोगों की सूची बनेगी तो मेरा पहला नंबर होगा।'लोकार्पण के मौके पर केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति राज्य मंत्री प्रहलाद ¨सह पटेल, वरिष्ठ पत्रकार प्रभु चावला भी उपस्थित थे। 

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