जागरण संवाददाता, हरिद्वार : कोरोना जांच में तेजी लाने को सरकार ने हरिद्वार जिले को करीब दो महीने पहले मोबाइल डायग्नोस्टिक लैब तो मुहैया करा दी। आरटीपीसीआर जांच को आइसीएमआर की स्वीकृति न मिलने से इसका उपयोग नहीं हो पा रहा है। हालांकि जिलाधिकारी के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने सैंपलिग में तेजी तो लाई है। अब भी आरटीपीसीआर जांच के लिए सैंपल बाहर भेजे जा रहे हैं। जिसकी रिपोर्ट सात से दस दिन में आ रही है। यही वजह है कि 4500 से अधिक व्यक्तियों को कोरोना रिपोर्ट का इंतजार है।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने दो अक्टूबर गांधी जयंती पर देहरादून में मोबाइल डायग्नोस्टिक लैब को हरी झंडी दिखाकर विधिवत लैब का आरंभ किया था। साथ ही घोषणा की थी कि लैब हरिद्वार जिले में कार्य करेगी। हैरत की बात यह कि करीब दो महीने बाद भी लैब शुरू नहीं हो पाई है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग अब भी इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आइसीएमआर) की स्वीकृति के इंतजार में हैं। हरिद्वार में भी कोविड टेस्टिग लैब अब तक स्थापित नहीं हो पाई है। आरटीपीसीआर जांच के लिए सैंपल दून, एम्स, चंडीगढ़ आदि लैबों को भेजे जा रहे हैं। जहां सामान्यतया सात से दस दिन में रिपोर्ट आ रही है। रिपोर्ट में देरी के चलते रिपोर्ट का बैकलॉक बढ़ता जा रहा है।

रविवार को सर्वाधिक 45 मामले

जिले में कोरोना के मामले फिर तेजी से बढ़ने लगे हैं। बीते एक सप्ताह के आंकड़ों पर गौर करें तो रविवार को सर्वाधिक 45 मामले आए। वहीं, 16 नवंबर को 09, 17 नवंबर को 16, 18 नवंबर को 34, 19 नवंबर को 29, 20 नवंबर को 33, 21 नवंबर को 30 मामले सामने आए। इधर रविवार को 2563 सैंपल लिए गए। इन्हें मिलाकर अब तक 213586 व्यक्तियों के सैंपल लिए जा चुके हैं। आठ व्यक्तियों के सीसीसी से डिस्चार्ज के बाद अब यहां 56 व्यक्ति भर्ती हैं। अब तक जिले में 10771 व्यक्तियों की रिपोर्ट पॉजिटिव आ चुकी है।

मोबाइल डायग्नोस्टिक लैब संचालित करने के लिए आइसीएमआर की स्वीकृति का इंतजार किया जा रहा है। स्वीकृति मिलते ही लैब से भी जांच की सुविधा मिलने लगेगी। हरिद्वार में भी कोविड जांच के लिए जल्द लैब स्थापित होगी।

डॉ. शंभूनाथ झा, सीएमओ, हरिद्वार

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