पश्चिम चंपारण(बगहा), जासं : गंडक बराज के जलाशय में हजारों किलोमीटर की लंबी उड़ान भरकर आए प्रवासी पक्षी यहां चार महीने के प्रवास के बाद अब अपने वतन की ओर लौटने लगे हैं। इन प्रवासी पक्षियों के कई झुंड उड़ान भर चुके हैं। जो बचे हैं वे भी अब यहां से अपने मूल पतन की वापसी की उड़ान भरने की तैयारी में हैं।

एशिया और यूूूूरोप के ठंडे देशों से विभिन्न प्रजातियों के पक्षी हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर गंडक बराज के जलाशय में आते हैं। यह पक्षी नवंबर माह से आना शुरू करते हैं। लगभग चार माह तक यहां प्रवास करने के बाद प्रवासी पङ्क्षरदे अपने वतन लौट जाते हैं। सर्दियों के मौसम में ठंडे देशों का तापमान जीरो डिग्री सेल्सियस के नीचे पहुंच जाता है। झीलों का पानी जमकर बर्फ में तब्दील हो जाता है। ऐसे में पक्षियों के लिए आवास और भोजन की समस्या पैदा होती है। ठंडे देशों में यह मौसम इनके प्रजनन के लिए भी अनुकूल नहीं रहता। तब यह भारत जैसे गर्म देशों में आ जाते हैं। यहां इन्हें अनुकूल प्राकृतिक आवास, प्रजनन का अनुकूल वातावरण ही नहीं पर्याप्त सुरक्षा भी है। हालांकि शिकारी मौका पाकर इनका शिकार भी कर लेते हैं, लेकिन वन कर्मियों की पेट्रोङ्क्षलग के चलते यहां शिकार कम हो पाता है। प्रकृति प्रेमी मनोज कुमार का कहना है कि अब प्रवासी पक्षी गंडक बराज के जलाशय से उड़ रहे हैं। मौसम गर्म होते ही इनकी रवानगी हो जाती है।

यूरोप, मध्य एशिया, पूर्वी साइबेरिया, चीन और लद्दाख से पहुंचते हैं पक्षी :

ये प्रवासी पङ्क्षरदे मुख्य रूप से यूरोप, मध्य एशिया, पूर्वी साइबेरिया, चीन और लद्दाख से खूबसूरत रंग-बिरंगे पक्षी आते हैं। इसमें अबलक, कुर्चिया बत्तख, ब्राहमानी डक, कूट, मूर हेन, ग्रेलेग गूस, बार हेडेड गूस, टस्टेड डक समेत कई प्रजातियों के पक्षी हजारों की संख्या में यहां आते हैं।

 

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