नई दिल्ली (राजेश उपाध्याय)। स्वास्थ्य का असली मूल्य हमें तब तक समझ नहीं आता, जब तक हम इसे खो नहीं देते। इसलिए कहा जाता है कि निरोग रहना सबसे बड़ी नेमत है। इलाज से बेहतर बचाव है। तभी सारी दुनिया में आज इस बात पर जोर है कि नागरिकों को कैसे बीमार होने से बचाया जाए। रोगों को कैसे दूर रखा जाए। योग, व्यायाम, जीवन शैली व खान-पान की आदतों में बदलाव और सफाई ये पांच तत्व हैं, जिनसे आप एक स्वस्थ और निरोग शरीर हासिल कर सकते हैं। व्यक्ति स्वस्थ है तभी वह अन्य चीजों का आनंद लेने में सक्षम होता है। बीमार को तो मिठाई भी कड़वी लगती है।

स्वास्थ्य से जुड़ा दूसरा पहलू है इलाज। अगर बीमार हुए तो बेहतर इलाज की सुविधा कैसे उपलब्ध हो? क्या इलाज के लिए डॉक्टर और अस्पताल घर के आसपास हैं ? अगर हाँ, तो उनका स्तर और उनकी उपलब्धता कितनी है? स्वास्थ्य सेवाओं में भारत भले ही पडोसी देशों से आगे दिख रहा हो, लेकिन अभी बहुत काम करना है। अभी भारत में सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी का एक फीसदी से थोड़ा ही अधिक स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च होता है। यानी, देश में प्रति व्यक्ति स्वास्थ्य पर होने वाला खर्च महज तीन रुपए रोजाना है। 

भारतीय ऋषि- मुनियों ने स्वास्थ्य के प्रति हमें सदैव सचेत किया था। भास्कराचार्य - पतंजलि की परंपरा तो हमें अब भी देखने को मिल रही है। भारत का राजनीतिक-सामाजिक नेतृत्व भी सजग रहा है। महात्मा गांधी ने स्वास्थ्य सेवाओं की कमी को पहचान कर इसे शीर्ष प्राथमिकताओं में रखने के लिए कहा था। बापू कहते थे कि नागरिकों के लिए 'सोना' नहीं स्वास्थ्य ही सबसे महत्वपूर्ण आभूषण है। इसीलिए, हमारे संविधान में नागरिकों की सेहत का ख्याल रखने के लिए कहा गया है और इसकी जिम्मेदारी राज्यों को सौंपी गई है।

अच्छी बात यह है कि राज्यों में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति फोकस और बजट बढ़ाया जा रहा है। केंद्र सरकार ने स्वास्थ्य बजट को जल्द से जल्द दोगुना करने का इरादा जताया है। सरकार ने इस साल के बजट में राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना की घोषणा की है। इसे मोदीकेयर का नाम दिया जा रहा है। इसके तहत गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले हर नागरिक को पांच लाख रुपए का स्वास्थ्य बीमा मिलेगा।

2017 की हेल्थ पॉलिसी में 2025 तक सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं को अभी की स्थिति से 50 फीसदी तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। भारत सरकार ने फरवरी 2017 में माना माना था कि भारत में 1,668 लोगों पर एक डॉक्टर है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, प्रति हजार लोगों पर एक डॉक्टर होना चाहिए। सरकार को यह आंकड़ा ठीक करने के लिए तेजी से काम करना होगा।

 

सरकार तो गंभीर दिख रही है। क्या आप अपनी और परिजनों की सेहत को लेकर सजग है? सेहत से जुड़े इन बुनियादी सवालों पर विचार करें और बताएं, आपका शहर इन मानकों पर कहाँ ठहरता है?

1. आप अपने शहर में अस्पताल और स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता को कैसा मानते हैं?
(बेहतरीन – तीन वर्ग किलोमीटर के भीतर अस्पताल, बहुत अच्छा – छह वर्ग किलोमीटर में एक अस्पताल, औसत – दस वर्ग किलोमीटर में एक अस्पताल, कामचलाऊ – 12 वर्ग किलोमीटर में एक अस्पताल, बेकार – 15 वर्ग किलोमीटर या उससे ज्यादा में एक अस्पताल)

2. क्या आपके शहर के अस्पताल में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
(बुनियादी सुविधाओं में – बच्चों का डॉक्टर, हड्डियों का डॉक्टर, महिला व प्रसूति विशेषज्ञ, कैंसर विशेषज्ञ, खून और मल मूत्र की जांच की सुविधा, एक्सरे आदि की सुविधा इत्यादि की सुविधा और साथ में बिजली और पानी की निर्बाध आपूर्ति की सुविधा)

3. क्या आपके शहर के सरकारी अस्पताल में पर्याप्त संख्या में डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ उपलब्ध हैं?
o बेहतरीन – दस हजार की आबादी पर 40 या उससे ज्यादा पेशेवर कर्मचारी
o बहुत अच्छा – दस हजार की आबादी पर 30 से 39 पेशेवर कर्मचारी
o औसत – दस हजार की आबादी पर 20 से 29 पेशेवर कर्मचारी
o कामचलाऊ – दस हजार की आबादी पर 10 से 20 पेशेवर कर्मचारी
o बेकार – दस हजार की आबादी पर दस से भी कम पेशेवर कर्मचारी

4. अस्पताल के डॉक्टर्स और नर्सिग स्टाफ के व्यवहार और उपलब्धता को आप कैसा मानते हैं?

5. किसी इमरजेंसी जैसे एक्सीडेंट की स्थिति में अपने शहर की मेडिकल सुविधा के रिस्पांस यानी प्रतिक्रिया को आप कैसा मानते हैं?
(बेहतरीन – जीरो से तीन मिनट में, बहुत अच्छा – तीन से छह मिनट में, औसत- छह से दस मिनट में, कामचलाऊ – दस से 12 मिनट में और बेकार – 12 मिनट या उससे ज्यादा समय में)

6. अपने शहर में जीवन रक्षक दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और स्वास्थ्य से जुड़े दूसरे उपकरणों की उपलब्धता को आप कैसा मानते हैं?

7. अपने शहर के सरकारी अस्पताल की साफ सफाई को आप कैसा मानते हैं?

8. आपके शहर निजी अस्पताल कितना सस्ता या महंगा है? 

9. योग केंद्र, मानसिक स्वास्थ्य देखभाल इत्यादि जैसे समग्र स्वास्थ्य देखभाल के मामले में अपने शहर को आप कैसा मानते हैं?

By Nandlal Sharma