पटना। देश-दुनिया में कला और शिल्प के जरिए अपनी पहचान बनाने वाला पटना कला एवं शिल्प महाविद्यालय का गौरवशाली इतिहास रहा है। विद्यापति मार्ग पर स्थित कॉलेज कला प्रशिक्षण केंद्र के लिए जाना जाता रहा है।

कॉलेज को स्थापित करने का श्रेय वरिष्ठ कलाकार राधामोहन को जाता है। कॉलेज की नींव 1939 में रखी गई थी। स्थापना काल के बाद कॉलेज ने कई ऐसे छात्र दिए, जो कला के क्षेत्र में देश-दुनिया में नाम कमा रहे हैं। कॉलेज की गरिमा में चार-चांद लगाने के लिए कला एवं शिल्प की पढ़ाई के साथ नृत्य, संगीत और रंगमंच की पढ़ाई को लेकर बात हुई थी। पटना विवि के स्टूडेंट वेलफेयर के प्रो. एनके झा ने बताया कि वर्ष 2019 में आर्ट कॉलेज परिसर में परफॉर्मिग आर्ट की पढ़ाई को लेकर प्रारूप तैयार हो गया था। वहीं एकेडिमक काउंसिल की ओर से प्रस्ताव को भी मंजूरी मिल गई थी। इसके साथ कॉलेज में मास्टर डिग्री की पढ़ाई को लेकर भी विवि की ओर से प्रोफाइल बना कर सरकार को भेजा गया था। फाइल शिक्षा विभाग के पास भेज दी गई है, लेकिन अभी तक इसी पर कोई विचार नहीं किया गया। विश्वविद्यालय की ओर से हरसंभव प्रयास होगा। कॉलेज के पूर्ववर्ती छात्र हिमांशु की मानें तो वर्ष 2019 से महाविद्यालय में नृत्य, संगीत और रंगमंच की पढ़ाई आरंभ होने की बात कही गई थी। लेकिन सिर्फ आश्वासन तक रह गया। हिमांशु ने बताया कि काफी लंबे समय से महाविद्यालय में मास्टर डिग्री की पढ़ाई को लेकर सिर्फ कार्ययोजना बन रही है। ऐसे में छात्र उच्च शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों का रुख करते हैं। कॉलेज के पूर्ववर्ती छात्र व चित्रकार वीरेंद्र कुमार कहते हैं कि कला शिल्प महाविद्यालय की पहचान चाक्षुष कला की पढ़ाई के लिए रही है। ऐसे में कॉलेज परिसर में परफॉर्मिग आर्ट्स की पढ़ाई ठीक नहीं है, क्योंकि दोनों पढ़ाई में अंतर है। चाक्षुष कला की पढ़ाई फरफॉर्मिग आटर््स से अलग होती है। इन विषयों की पढ़ाई नृत्य कला मंदिर, प्रेमचंद रंगशाला आदि जगहों पर हो तो बेहतर होगा। सरकार को इस दिशा में पहल करने की जरूरत है।

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