रीतु शर्मा, बसोहली: जिले की बनी तहसील के दुर्गम पहाड़ियों पर स्थित जोडेया माता मंदिर का दरबार श्रद्धालुओं के लिए आस्था का संगम है। यहा पर साल में दो बार नवरात्र में इतनी ज्यादा श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिलती है जो कई बार लाख का आकड़ा पार कर चुकी है। शिवालिक श्रेणी की पहाड़ियों पर समुद्र तल से 6250 फीट की ऊंचाई पर स्थित जोडे़यां माता मंदिर पर्यटकों के लिए भी मनोरम दृश्य प्रदान करने वाला है। यहा अक्सर पर्यटकों की टोलिया माता के मंदिर में माथा टेकेन के लिए आती हैं। साथ ही ट्रेकिंग भी हो जाती है।

पूंड से कोट तक वाहन के माध्यम से जाया जाता है, इसके बाद पैदल लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर बाजल आता है, उसके बाद 4 किलोमीटर के करीब माता का दरबार है। इस मंदिर तक पहुंचने के लिए सरकार एवं प्रशासन द्वारा सुविधाओं के नाम पर कुछ भी उपलब्ध नहीं करवाया गया है। इसके बावजूद हर वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या में इजाफा हो रहा है। कोट्स--

कोट से लेकर बाजल तक का पैदल रास्ता पथरीला और हादसों को न्यौता देने वाला है। यहा पर हर समय गिरने की आशका बनी रहती है। बारिश में श्रद्धालुओं को बचने के लिए कहीं भी कोई शेड तक नहीं बना है, जिस कारण श्रद्धालुओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

-बंसी लाल। कोट्स---

लाखों की तादाद में श्रद्धालु हर वर्ष आते हैं, मगर उन्हें सुविधाओं के अभाव में खुले में ही शौच करने को मजबूर होना पड़ता है। कोट से लेकर बाजल एवं बाजल से माता के दरबार तक रास्ते में कोई भी शौचालय की सुविधा नहीं है। सरकार को इस बारे में सोचना चाहिए।

- बोध राज। कोट्स---

माता के मंदिर में सुविधाओं को पहुंचाने के लिए हर स्तर पर प्रयास जारी रखूंगी। यह जगह पूरे जिले में सबसे ज्यादा आदरनीय स्थल है, लोग यहा पर कुछ पल सकून पाने के लिए आते हैं। उनकी आकंक्षाओं को पूरा जरूर से करुंगी।

- अनिता देवी, सरपंच, बाजल।

कोट्स--

कोट से बाजल और बाजल से माता के दरबार तक स्ट्रीट लाइट, शौचालय, शेड, बिजली पानी की सुविधा के लिए हर संभव प्रयास करूंगी। जिला प्रशासन से लेकर हर उच्चाधिकारी से बाजल के विकास के लिए लड़ने के लिये हर समय तैयार हूं।

- रीता देवी, सदस्य, डीडीसी बनी। कोट्स--

जोडेया माता के दरबार में सुविधाओं को पहुंचाने के लिए कोई भी विभाग आगे नहीं आ रहा है। सड़क सुविधा नहीं, स्ट्रीट लाइट नहीं और शौचालय जो सबसे ज्यादा जरूरी इस रास्ते में होना चाहिए, इसे प्रदान करने के लिए सरकार को प्रयास करने चाहिए।

- सुशील बाजलिया। कोट्स--

माता के दरबार में सुविधाओं के नाम पर केवल आश्वासन दिए जाते रहे। इस मंदिर में केवल हिन्दू ही नहीं, बल्कि मुस्लिम समुदाय के लोग भी हर नवरात्र पर माथा टेकने के लिए आते हैं, मगर सरकार इस के प्रति आखें बंद किए हुए है।

- गोविंद राजा।

शॉर्ट मे जानें सभी बड़ी खबरें और पायें ई-पेपर,ऑडियो न्यूज़,और अन्य सर्विस, डाउनलोड जागरण ऐप

budget2021