जागरण संवाददाता, सरायकेला : कांड्रा के पदमपुर स्थित आदिवासी कला एवं सांस्कृतिक भवन सभागार में रविवार को सिघ दिशोम मांझी परगना महाल बड़पीड़ की बैठक बड़पीड़ परगना नंद लाल टुडू ने की। बैठक में 50 से अधिक गांवों के मांझी बाबा उपस्थित थे। टुडू ने कहा कि आदिवासी रीति-रिवाज व विरासत में मिली परंपरा को कायम रखना उनका मूल उद्देश्य है। समाज में शिक्षा का विकास उनकी प्राथमिकता है। समाज को आगे बढ़ाने के लिए संवैधानिक तौर पर मिले अधिकार की कड़ी को मजबूत किया जाएगा। बैठक में निर्णय लिया गया कि समाज से भेदभाव को दूर कर सामाजिक व्यवस्था कायम की जाएगी। समाज के सभी छोटे-बड़े मामले को सामाजिक स्तर पर निपटाने का निर्णय लिया गया। बैठक में माझी बाबा से लेकर नायके तक को सरकार की ओर से सम्मान दिलाने के लिए उपायुक्त को सूची सौंपी जाएगी। बैठक में सर्व सम्मति से लगभग 65 गांवों की सूची तैयार की गई। बैठक में परगनिक रामदास टुडू ने कहा कि समाज में शांति व समरसता कायम रखने के लिए उपायुक्त समेत कांड्रा, गम्हरिया आदि के थाना प्रभारियों के साथ नई टीम के सदस्यों की बैठक कराई जाएगी। नई टीम में बड़पीड़ परगना के पद पर नंद लाल टुडू, कारनी सुरु टुडू (दुग्धा), परगनिक राम दास टुडू(बड़ा हरिहरपुर), मोडैत सोनाराम मांझी(पिडराबेड़ा), लेरूक हेमंत मार्डी(पिडराबेड़ा), नायक बहादुर सोरेन(रांगाटांड़) व कुडाम नायके पिटू सोरेन(रंगाटांड़) को सर्व सम्मति से मनोनीत किया गया। इस अवसर पर कार्यवाहक सदस्यों के रूप में गुलिया बेसरा, रवि हांसदा, देव मार्डी, विक्रम मुर्मू, लखिन्द्र मार्डी, दास सिंह सोरेन, गुरुवा सोरेन आदि को शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री को दिया साधुवाद : बैठक में सरना कोड का प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को अग्रसारित करने के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को साधुवाद दिया गया। टुडू ने कहा कि मुख्यमंत्री ने आदिवासी समाज का सम्मान बढ़ाया है।

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