हंसराज सैनी, मंडी

होम क्वारंटाइन कोरोना से संक्रमित मरीज अब लक्ष्मण रेखा नहीं लांघ पाएंगे। घर से बाहर निकलना तो दूर, एक से दूसरे कमरे में भी नहीं जा पाएंगे। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) मंडी के स्कूल ऑफ कंप्यूटिग साइंस एवं इंजीनियरिग के शोधकत्र्ताओं ने लक्ष्मण रेखा मोबाइल एप (प्रोटोटाइप) विकसित किया है। यह कोरोना से संक्रमित होम क्वारंटाइन मरीजों पर मोबाइल फोन फेस डिटेक्शन व जिओफेंस से नजर रखेगा।

इस प्रोटोटाइप से प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग को राहत मिलेगी। कई दौर के परीक्षण की कसौटी पर प्रोटोटाइप खरा उतरा है। कोरोना से संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ने के बाद केंद्र सरकार ने बिना लक्षणों वाले संक्रमितों को होम क्वारंटाइन के आदेश दिए हैं। इनकी निगरानी का जिम्मा आशा कार्यकत्र्ता, आंगनबाड़ी कार्यकत्र्ता या फिर पुलिस को सौंपा है। इसके बावजूद होम क्वारंटाइन जंप करने की शिकायतें प्रशासन के पास आ रही हैं। इससे संक्रमण फैलने का खतरा और बढ़ रहा है। एक क्षेत्र में अनेक संक्रमित मरीज होने से उन पर निगरानी रखना संभव नहीं हो पा रहा था। होम आइसोलेट किए गए संक्रमितों पर नजर रखने के लिए प्रशासन को हजारों कर्मचारियों की ड्यूटी लगानी पड़ रही है। इससे सरकार का आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। इस समस्या से निजात दिलाने के लिए स्कूल ऑफ कंप्यूटिग एवं इंजीनियरिग के सहायक प्रोफेसर डा. आदित्य निगम की देखरेख में लक्ष्मण रेखा प्रोटोटाइप विकसित किया गया है।

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कैसे काम करेगा प्रोटोटाइप

देश में अधिकांश लोगों के पास एंड्रॉइड मोबाइल फोन है। उसमें इंटरनेट डाटा, जीपीएस व फ्रंट कैमरा की सुविधा रहती है। अगर कोई व्यक्ति कोरोना से संक्रमित पाया जाता है तो स्वास्थ्य विभाग उसके मोबाइल फोन पर लक्ष्मण रेखा मोबाइल एप डाउनलोड करेगा। मरीज को मोबाइल फोन का जीपीएस व डाटा ऑन रखने के निर्देश दिए जाएंगे। प्रोटोटाइप मरीज का फेस डिक्टेक कर व उसके कमरे की लोकेशन का डाटा सर्वर पर प्रेषित कर देगा। इसके बाद हर 15 मिनट के बाद प्रोटोटाइप मोबाइल फोन का फ्रंट कैमरा अपने आप ऑन कर देगा। मरीज को फेस डिटेक्शन के संदेश मिलने शुरू हो जाएंगे। प्रोटोटाइप एक जिओफेंस क्षेत्र तैयार कर देगा। फेस डिक्टेशन व उसे जिओफेंस क्षेत्र की जानकारी सर्वर पर 15-15 मिनट बाद अपने आप प्रेषित होती रहेगी। अगर मरीज अपने जिओफेंस क्षेत्र से बाहर जाता है तो इसकी जानकारी तुरंत स्वास्थ्य विभाग को मिल जाएगी।

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होम क्वारंटाइन कोरोना से संक्रमितों पर नजर रखना पहाड़ जैसी चुनौती है। लक्ष्मण रेखा मोबाइल एप (प्रोटोटाइप) से विभाग व प्रशासन को बड़ी राहत मिलेगी।

-डा. जीवानंद चौहान, वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक लाल बहादुर शास्त्री मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल नेरचौक।

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कई दौर के परीक्षण में लक्ष्मण रेखा प्रोटोटाइप कसौटी पर खरा उतरा है। प्रोटोटाइप से होम क्वारंटाइन कोरोना से संक्रमितों पर नजर रखना संभव होगा।

-डा. आदित्य निगम, सहायक प्रोफेसर आइआइटी मंडी।

Edited By: Jagran