बेतिया। अगर अब तक किसान धान की फसल की कटनी नहीं की है, तो वे इस बात का ध्यान रखें कि धान की कटाई एक हाथ छोड़ कर ही करें। किसान यदि ऐसा करते हैं, तो अगली फसल के लिए धान का यह झ़ुरमुट पोषक तत्वों के रूप में काम करेगा। लेकिन किसी भी सूरत में इसे जलाएं नहीं। धन के झ़ुरमुट को जलाने से इसका प्रतिकूल असर पर्यावरण संरक्षण पर पडेगा। यह कहना है राजेन्द्र केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, समस्तीपुर के गन्ना अनुसंधान केन्द्र के मृदा वैज्ञानिक डा. अजित कुमार का। उनके अनुसार धान के झ़ुरमुट यानी पराली को नहीं जलाना चाहिए। आज पंजाब एवं हरियाना में पराली जलाने से जो प्रतिकूल असर पड़ा है, उससे किसानों को सीख लेने की जरूरत है।

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मिनरलाइजेशन प्रक्रिया से अगली फसलों को मिलते हैं पोषक तत्व

धान की खेत में छूटे हुए झ़ुरमुट सड़ने के बाद अगली फसल के लिए आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध करता है। किसानों को जुताई के पूर्व इसमें वेस्ट डिकंपोजर इस्तेमाल करना चाहिए। इसके इस्तेमाल से खेतों में बचे धान के शेष भाग अपघटित होकर पोषक तत्वों के रूप में परिवर्तित हो जाता है। जानकार बताते हैँ कि इस दौरान मिनराइजेशन की क्रिया होती है। इसमें कार्बनिक पदार्थ अकार्बनिक पदार्थ के रूप में परिवर्तित होकर नाइट्रेट, फास्फेट, कार्बोनेट आयन के रूप में परिवर्तित हो जाता है। मृदा वैज्ञानिक के अनुसार मृदा में उपस्थित इस तरह के आयन फसलों के लिए आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं। उनके अनुसार किसी भी फसल के लिए 16 तरह के आवश्यक तत्वों की आवश्यकता होती है। इसे किसान उर्वरक के रूप में उपलब्ध कराते हैं। इसमें नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, कैल्सियम, मैग्नेशियम, सल्फर को फसल अधिक मात्रा में अवशोषित करते हैं। जबकि अन्य पोषक तत्व पाधों के द्वारा कम मात्रा में लिया जात है। इसमें मिनराइजेशन के द्वारा जो पोषक तत्व फसलों को मिलते हैं, वह शुद्ध् रूप में उपलब्ध होते हैं। दूसरी ओर यदि हम इसे विभिन्न उर्वरकों के रूप में मृदा में डालते हैं, तो पोषक तत्वों के साथ अन्य तरह के पदार्थ भी आते हैं, जो मृदा की सेहत पर प्रतिकूल असर डालते हैं।

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