जागरण संवाददाता, करनाल : कोरोना महामारी में कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कालेज में शुरू की गई कोरोना टेस्टिग लैब को सुचारू रूप से चलाने के लिए कांट्रेक्ट पर चार साइंटिस्ट, आठ रिसर्च एसोसिएट व आठ लैब टेक्निशियन को रखा गया था। उनका कांट्रेक्ट खत्म हो जाने के बाद उसको रिन्यू नहीं किया गया, जिसके बाद वे हड़ताल पर चले गए। इससे विभागीय कामकाज खासा प्रभावित हुआ।

हड़ताल के चलते कोरोना सैंपल की जांच प्रभावित हुई तो स्वास्थ्य विभाग व केसीजीएमसी प्रबंधन के हाथ-पांव फूल गए। सैंपल की रिपोर्ट भी प्रभावित होने लगी। आनन-फानन में लैब के स्टाफ को मुख्यालय संपर्क करने के बाद सिविल सर्जन डा. योगेश शर्मा ने आश्वस्त किया कि 31 मार्च तक कांट्रेक्ट खत्म नहीं होगा। इस बारे में बात चल रही है। इधर मेडिकल कालेज के निदेशक डा. जेसी दुरेजा ने भी मुख्यालय में इस संबंध में बात करने की बात कही। आश्वासन के बाद मंगलवार दोपहर बाद लैब के 20 स्टाफ सदस्यों ने काम शुरू किया।

मंगलवार को फरवरी माह में दूसरी बार कोरोना संक्रमण के 24 मामले आए हैं। लगातार बढ़ रहे कोरोना के मामलों ने चिता बढ़ा दी है। सिविल सर्जन की रिपोर्ट के अनुसार जिले में अब तक कोरोना वायरस संक्रमण से आशंकित कुल 213506 व्यक्तियों के सैंपल लिए जा चुके हैं। इनमें 200439 की रिपोर्ट नेगेटिव आई है। पॉजिटिव मामलों की संख्या 11347 है, जिनमें 153 मरीजों की मृत्यु हो चुकी है। एक्टिव मामलों की संख्या बढ़कर 125 हो गई है। जबकि 11069 मरीज ठीक होकर अपने घर चले गए हैं।

16 से 23 फरवरी के बीच कोरोना के ग्राफ की स्थिति

तारीख पॉजिटिव केस की संख्या

16 फरवरी 12 केस

17 फरवरी 11

18 फरवरी 13

19 फरवरी 12

20 फरवरी 24

21 फरवरी 21

22 फरवरी 14

23 फरवरी 24

नोट : ये आंकड़े स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी किए गए हैं। मेरे संज्ञान में यह मामला आया था कि कांट्रेक्ट रिन्यू नहीं होने के कारण लैब स्टाफ हड़ताल पर चला गया है। इस मामले में एमडी एनएचएम से तुरंत बात की गई और कोरोना के बारे में करनाल की स्थिति के बारे में अवगत कराया गया। उन्होंने एमडी से बातचीत करके इस मामले में हस्तक्षेप कर तुरंत समाधान का आग्रह किया। इसके बाद एमडी एनएचएम ने डीजीएमइआर से बातचीत कर इस पर तुरंत संज्ञान लिया और 31 मार्च तक लैब के स्टाफ का कांट्रेक्ट खत्म नहीं करने का आश्वासन के बारे में मुझे जानकारी दी। स्टाफ से मैंने बातचीत की थी, जिससे वह सहमत होकर लैब में काम पर लौट गए। इस समय हालात भी कोरोना को लेकर संवेदनशील बने हुए हैं। उच्चाधिकारियों ने हालात पर गौर किया तो समाधान भी निकला। अब काम सुचारू है।

डा. योगेश शर्मा, सिविल सर्जन करनाल।

कोविड-19 के दौर में इन्हें छह माह के लिए कांट्रेक्ट पर रखा गया था। उनका कांट्रेक्ट खत्म हो गया है। उनके विरोध के बाद हमने मुख्यालय में बात की है। मामला सुलझा लिया गया है। पूरा स्टाफ काम पर लौट आया है।

डा. जेसी दुरेजा, निदेशक केसीजीएमसी करनाल।

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