वाराणसी, जेएनएन। अयोध्या में प्रभु श्रीराम मंदिर निर्माण में वास्तु में समर्पित करने के लिहाज से देश भर की 16 नदियों की मिट्टी व जल संग्रह के क्रम में बनारस में जुटान हुई। काशी क्षेत्र से मिट्टïी व जल बाहर भेजने के निषेध को देखते हुए कैथी में गंगा-गोमती संगम तट से जल- मिट्टïी संग्रहण किया गया। काशी विश्वनाथ मंदिर के अर्चक पं. श्रीकांत मिश्र के आचार्यत्व में इसका केदारघाट पर विधिवत इसका पूजा-अर्चना किया गया।

वैदिक विद्वान चंद्रशेखर द्राविड़ ने बताया कि संग्रहित जल-मिट्टïी श्रृंगेरी भेजा जाएगा जहां पांच मार्च को शंकराचार्य स्वामी भारती तीर्थ महाराज सभी 16 नदियों की जल-मिट्टïी का पूजन करेंगे। इसे वर्षपर्यंत देश के लगभग एक करोड़ राम भक्त परिवारों के मध्य ले जाया जाएगा। साथ ही इसे अगले साल अयोध्या में श्रीराम मंदिर के वास्तु में समॢपत कर दिया जाएगा। इसके लिए शंकराचार्य की प्रेरणा से गंगा, यमुना, सरस्वती, गोदावरी, सिंधु, कृष्णा, कावेरी, सरयू, ब्रह्मपुत्र, गंडकी समेत देश के 16 नदियों के जल-मिटटी का संग्रहण का देशव्यापी अभियान शुरू किया गया है। इस निमित्त ही सोमवार को अयोध्या में सरयू नदी का जल लेकर पूजन करने के पश्चात विश्व हिंदू परिषद के महासचिव चंपत राय एवं महंत नृत्य गोपाल दास से मुलाकात कर संपूर्ण कार्यक्रम की जानकारी दी गई थी। पूजन-अनुष्ठान के दौरान शंकरा टीवी के प्रबंध निदेशक हरीकृष्ण, केंद्रीय ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय महासचिव चेल्ला सुब्बाराव, श्रृंगेरी मठ काशी के प्रबंधक चल्ला अन्नपूर्णा प्रसाद, चल्ला जगन्नाथ शास्त्री, नारायण शास्त्री, श्रीधर वासुदेवन, अनिरुद्ध घनपाठी आदि थे।

जैन समाज का चार मार्च को रथावर्तन महोत्सव

जैन समाज चार मार्च को रथावर्तन महोत्सव मनाएगा। इसमें दो बड़े संतों के साथ ही देश भर से अनुयायियों की जुटान होगी। इस क्रम में जैन संत आचार्य प्रसन्न सागर महाराज का 25 फरवरी को सुबह नौ बजे आगमन हो रहा है। दिगंबर जैन समाज काशी की ओर से उनका गाजे-बाजे के साथ मंडुआडीह, महमूरगंज, रथयात्रा, कमच्छा में भव्य स्वागत किया जाएगा। संत प्रसन्न सागर काशी में 28 फरवरी तक प्रवास करेंगे।

वहीं आचार्य विद्या सागर के शिष्य मुनि प्रमाण सागर एक मार्च को बनारस आ रहे हैैं। वे मुनिसंघ व जनसमूह के साथ पदयात्रा करते आ रहा हैैं। बनारस में दो से चार मार्च तक धर्म सभा, शंका समाधान आदि करेंगे। इसमें पहले दिन अस्सी पर भावना योग तो दूसरे दिन जैन तीर्थंकरों की प्रतिमाओं का महास्तकाभिषेक किया जाएगा। चार मार्च को एंग्लो बंगाली टोला में महासभा की जाएगी। इसके बाद भगवान पाश्र्वनाथ के जन्म स्थान से निर्वाण भूमि सम्मेद शिखर तक 380 किलोमीटर की पदयात्रा शुरू होगी। इसे रथावर्तन महोत्सव नाम दिया गया है। इसमें देश भर से अनुयायियों के साथ ही संस्कृति मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल समेत जनप्रतिनिधि भी शामिल होंगे। 

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