देवरिया: लखनऊ के रियल एस्टेट कारोबारी का अपहरण कर देवरिया जेल में हुई पिटाई के मामले की जांच कर रही सीबीआइ की टीम गुरुवार को देवरिया पहुंची। कोतवाली पुलिस से तत्कालीन जेल अधीक्षक समेत पांच कर्मियों पर दर्ज मुकदमे की कापी ली और उसका अध्ययन कर रही है। कहा जा रहा है कि सीबीआइ की टीम जेल में दौरा करेगी।

सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर सात मई 2019 को कोतवाली में तत्कालीन जेल अधीक्षक दिलीप पांडेय, जेलर मुकेश कटियार, डिप्टी जेलर देवनाथ यादव, हेड जेल वार्डर मुन्ना पांडेय व राकेश पांडेय के खिलाफ जेल अधीक्षक केपी त्रिपाठी ने मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले की जांच कोतवाली में तैनात विवेचक बृजेश दुबे द्वारा की जा रही है। इस बीच सीबीआइ की टीम पूरे प्रकरण की जांच करने के लिए एक बार फिर देवरिया आ गई है और कोतवाली पहुंच मुकदमे से संबंधित कापी लेने के अलावा मामले की विवेचना कर रहे उप निरीक्षक से भी मुलाकात की और प्रगति के बारे में जानकारी ली। सीबीआइ डाक बंगला में अपना डेरा जमाए हुए है। यह है पूरा मामला

लखनऊ के आलमबाग के विश्वेश्वर नगर निवासी मोहित जायसवाल रियल एस्टेट के कारोबारी है। 26 दिसंबर 2018 को लखनऊ से अपहरण कर उन्हे देवरिया लाया गया। मोहित ने आरोप लगाया था कि जेल में बंद बाहबली अतीक अहमद व उसके गुर्गों ने उसकी पिटाई की। साथ ही उनकी दो कंपनियों को भी जबरिया हड़पते हुए कागजात पर हस्ताक्षर करा लिया। इस मामले में लखनऊ के आलमबाग थाने में अतीक, फारुख, जकी अहमद, उमर, जफरउल्लाह, गुलाब सरवर और एक दर्जन अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ। इस मामले में डिप्टी जेलर देवनाथ यादव, हेड जेल वार्डर मुन्ना पांडेय, राकेश शर्मा को उस समय ही निलंबित कर दिया गया था और अतीक को 31 दिसंबर 2018 को दूसरे जेल में शिफ्ट कर दिया गया था। देवरिया में इन मामलों की जांच कर रही सीबीआइ

देवरिया में तीन मामलों की जांच सीबीआइ कर रही है। जिसमें बाल गृह बालिका कांड, अवैध बालू खनन व जेल में रियल एस्टेट कारोबारी की हुई पिटाई का मामला शामिल है।

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