संवाद सहयोगी, पिथौरागढ़: लेखक व साहित्यकार डा. पीतांबर अवस्थी ने कुमाऊंनी सोरयाली भाषा में जड़ी बूटी पर आधारित रोगनाशी जड़ी बूटी नाम से पुस्तक लिखी है। पुस्तक का विमोचन करते हुए अतिथियों ने डॉ. अवस्थी के प्रयासों की सराहना की और कहा कि यह पुस्तक निश्चित रू प से बीमारियों से लड़ने के साथ ही कुमाऊंनी भाषा के संरक्षण के लिए कारगर साबित होगी।

गुरु वार को ज्ञान प्रकाश संस्कृत पुस्तकालय सभागार में आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि विधायक चंद्रा पंत, डीआरडीओ के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. हेमंत पांडेय, जनकवि शूल, रंगकर्मी जनार्दन उप्रेती, मंजुला अवस्थी, डा. प्रमोद कुमार श्रोत्रिय, डा. आनंदी जोशी, लक्ष्मी आर्या, आशा सौन ने संयुक्त रू प से पुस्तक का विमोचन किया। समारोह में मुख्य वक्ता के रू प में मौजूद वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. पांडेय ने पुस्तक की सराहना करते हुए कहा कि आयुर्वेदिक एवं जड़ी बूटी द्वारा उपचार करने से रोग समूल नष्ट हो जाता है। साथ ही आयुर्वेदिक औषधि के दुष्परिणाम भी नहीं होते हैं। उन्होंने कहा कि सभी को आयुर्वेदिक औषधियों का ही प्रयोग करना चाहिए। मुख्य अतिथि विधायक चंद्रा ने कहा कि डा. अवस्थी ने इस पुस्तक को स्थानीय सोरयाली भाषा में लिखकर जड़ी-बूटियों का महत्व बताया है। यह पुस्तक नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है। विशिष्ट अतिथि शूल ने कहा कि जहां वर्तमान समय में लोग पाश्चात्य संस्कृति की ओर बढ़ रहे हैं, वहीं डा. अवस्थी ने सोरयाली भाषा में साहित्य रचकर अपनी दुदबोली को पल्लवित व पुष्पित करने का काम किया है। संचालन करते हुए जनकवि उप्रेती ने कहा कि यह पुस्तक समाज के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी। समापन अवसर पर डा. अवस्थी ने सभी का आभार प्रकट किया।

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