जागरण संवाददाता,चित्रकूट : आयुष मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मदनगोपाल वाजपेयी ने प्रेस वार्ता कर कहा कि आयुष मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय संरक्षक व सीसीआइएम के पूर्व अध्यक्ष डॉ. वीपी त्यागी के नेतृत्व में लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष में मोदी सरकार में आंशिक सफलता मिली है। अभी आयुष चिकित्सकों का आयुष सिद्धान्तों के अनुसार एक्स-रे, सोनोग्राफी का अधिकार व सूचना का अधिकार के लिए संघर्ष जारी है।

ज्ञात हो कि केंद्र सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर आयुर्वेद अध्ययन के पाठ्यक्रम में संशोधन कर भारतीय चिकित्सा परिषद् संशोधन विनियम 2020 जारी कर आयुर्वेद चिकित्सकों को भी अंग्रेजी डॉक्टरों के समान सर्जरी करने का अधिकार दे दिया गया है। इस विनियम में पाठ्यक्रम में सर्जिकल प्रक्रिया के लिए प्रशिक्षण माड्यूल को जोड़ा गया है। इसमें आयुर्वेद के छात्र पढ़ाई के दौरान शल्य (सर्जरी) और शालक्य चिकित्सा के लिए प्रशिक्षित किये जायेंगे। आयुर्वेद (एमएस) के छात्रों को एमएस (आयुर्वेद) जनरल सर्जरी और एमएस (आयुर्वेद शालक्य तंत्र की दो विधाओं में प्रशिक्षित कर एमएस (आयुर्वेद जनरल सर्जरी और एमएस (आयुर्वेद शालक्य तंत्र (नेत्र, कान, नाक, गला, सिर और सिर दन्त चिकित्सा) जैसी शल्यतंत्र की उपाधियां भी दी जाएगी। छात्रों को स्तन की गांठों, अल्सर, मूत्र मार्ग के रोगों, पेट के बाहरी तत्वों की निकासी, ग्लूकोमा, मोतियाबिद हटाने और कई अन्य प्रकार की सर्जरी करने का अधिकार होगा।

केंद्र सरकार के पूर्व सलाहकार (आयुर्वेद) डॉ. एसके शर्मा ने कहा कि इससे देश में कुशल सर्जनों की कमी तो दूर होगी ही, साथ ही दूर-दराज क्षेत्रों के रोगियों को भी उच्च स्तर का इलाज भी मिल सकेगा। केंद्र सरकार के इस सकारात्मक निर्णय से हमारी पुरानी मांगों को बल मिला है। लेकिन आयुष सिद्धान्तों के अनुसार एक्स-रे, सोनोग्राफी का अधिकार व सूचिकाभरण के अधिकार के लिए संघर्ष जारी रहेगा।

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