समस्तीपुर। धान की कटाई के बाद अब गेहूं की बोआई का समय आ गया है। जिले के कई इलाकों में किसान गेहूं की बोआई करने में जुट गए हैं, लेकिन गेहूं के बीज बोने से पहले किसान थोड़ी सी पहल कर फसल को रोग मुक्त कर सकते हैं। बस, इसके लिए उन्हें बोआई करने से पहले बीज को उपचारित करना होगा। ये बातें जिला कृषि पदाधिकारी विकास कुमार ने कही।

उन्होंने बताया कि बीजों को उपचारित करना सस्ता भी है और आसान भी। किसान थोड़ा बहुत सामान जुटा कर खुद बीज को उपचारित कर सकते हैं। इससे आगे चल कर उनकी फसलें कई रोगों से मुक्त हो जाएगी। कृषि विभाग की भी इस बार बीजों को उपचारित कर लगाने पर जोर दे रहा है। इसके लिए किसानों को बीज को उपचारित करने का तरीका भी बताया जा रहा है। जिला कृषि पदाधिकारी बताते हैं कि बीज को उपचारित कर बीज में आने वाले रोगों से फसल को बचाया जा सकता है। श्री विधि से गेहूं की खेती करने पर एक एकड़ में दस किलो बीज की जरूरत पड़ती है। दस किलो गेहूं के बीज के उपचार के लिए गुनगुना पानी 20 लीटर, केंचुआ खाद पांच किलो, चार किलो गुड़, चार लीटर गौमूत्र तथा कार्बन्डाजिम फफूंदीनाशक 20 ग्राम की आवश्यकता होती है। इनमें से अधिकांश सामग्री किसान के घर और गांव में ही उपलब्ध हैं। बस थोड़ी सी पहल करनी होगी। बीज को उपचारित कर बोने से उनकी फसलें कई रोगों से मुक्त हो जाएंगी। कैसे करें बीज का उपचार

- 10 किलो बीज में से मिट्टी, कंकड़ व खराब बीजों को अलग कर छांट लें।

- 20 लीटर पानी सुशुम होने तक एक बर्तन में गर्म करें।

- छांटे हुए बीज को इस गर्म पानी में डाल दें।

- इस पानी में पांच किलो केंचुआ खाद, चार किलो गुड़ व चार लीटर गौमूत्र मिलाकर आठ घंटे के लिए छोड़ दें।

- आठ घंटे बाद इस मिश्रण को एक कपड़े से छान लें। इससे बीज व अन्य मिश्रण घोल से अलग हो जाए। घोल के पानी को फेंक दें।

- बीज एवं अन्य मिश्रण में कार्बन्डाजिम फफूंदी नाशक 20 ग्राम मिलाकर 12 घंटे तक अंकुरित होने के लिए गीले बोरे में बांध कर छोड़ दें। इसके बाद अंकुरित बीज को बोने के लिए इस्तेमाल करें।

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