गाजीपुर: हिन्दी और भोजपुरी के प्रति आजीवन समर्पित विन्ध्याचल राय 'अचल' को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए साहित्यकारों की बैठक डा. विवेकी राय की अध्यक्षता में शनिवार को गाजीपुर एक समाचार कार्यालय पर हुई। डा. विवेकी राय ने उन्हें एक कुशल प्राध्यापक व साहित्य के प्रति आजीवन समर्पित एक सिद्ध रचनाकार बताया। वहीं कहा कि वे निश्छल व्यक्ति के धनी थे। उनके निधन से साहित्य रचना के प्रति नि:स्वार्थ भाव से काम करने वाली पीढ़ी का अवसान हो गया है।

वरिष्ठ पत्रकार विजय कुमार ने कहा कि विंध्याचल राय गांव में रहकर देश और जिले के गौरवशाली व्यक्तियों 'किसान नेता स्वामी सहजानंद सरस्वती तथा स्वतंत्रता संग्राम में गाजीपुर के रणबांकुरे' जैसी पुस्तकों के माध्यम से यहां के क्रांतिकारियों के जीवन पर महत्वपूर्ण प्रकाशडाला है, जो युवकों एवं भावी पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी है। डा. मान्धाता राय ने अचल को गद्य और पद्य दोनों पर समान अधिकार वाला सहित्यकार बताया। सौभद्र, गांगेय और युग प्रदीप की प्रेरक कतिवओं से उन्हें 'कविजी' की उपाधि मिली तो 'क्रांतिकारी कबीर तथा प्रकृति पुत्र सुमित्रानंदन पंत' ने उनके यशस्वी आलोचक स्वरूप को पहचान दी। प्राचार्य डा. द्वारिका नाथ ने 'माया मिली न राम' और 'को बड़ छोट कहत अपराधू' कहानी संग्रह की उपलब्धियों को रेखांतिक किया। इस मौके पर डा. हितेन्द्र मिश्र, डा. विनय कुमार दुबे, डा. सतीश कुमार राय, रामाश्रय राय, पं. रामचन्द्र शर्मा, डा. हरिहर प्रसाद सिंह, अजय कुमार आदि मौजूद रहे। इसी क्रम में स्टीमरघाट स्थित अनंतदेव पाण्डेय अनंत के आवास पर आयोजित शोक सभा में हिन्दी व भोजपुरी के प्रसिद्ध कवि विन्ध्याचल राय अचल के निधन पर श्रद्धांजलि अर्पित की गयी। शेख जैनुल आब्दीन, विजय मधुरेश, विजय शंकर त्रिपाठी, दुर्गा प्रसाद तिवारी, गोपाल गौरव, रमेश कुमार श्रीवास्तव प्रेमी आदि उपस्थित रहे। अध्यक्षता डा. गौरीशंकर विमल व संचालन विजय कुमार मधुरेश ने किया।

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