गाजीपुर: पंडित रामचरित उपाध्याय स्मृति संस्थान रवीन्द्रपुरी में शुक्रवार को उपन्यासकार, कथाकार विन्ध्याचल राय अचल के निधन पर शोक जताया गया।

संस्थान के अध्यक्ष एवं साहित्यकार डा. जितेन्द्र नाथ पाठक ने दीर्घकालीन संस्मरणों की चर्चा करते हुए उनके बहुमुखी सृजन का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि स्व. अचल साहित्यकारों की संत परम्परा के ध्वजवाहक रहे। कोषाध्यक्ष नीरज श्रीवास्तव ने कहा कि हाल ही में संस्था की ओर से आयोजित भोजपुरी लोक रस कार्यक्रम में उन्हें अभिनंदन किया गया। जीवनोदय शिक्षा समिति के अध्यक्ष डा. राम नारायण तिवारी ने कहा कि अचल का व्यक्तित्व एवं कृतित्व भोजपुरी जगत का सबसे प्रभावशाली एवं प्रतिनिधि दर्पण है। इस अवसर पर साहित्य चेतना समाज के संयुक्त सचिव प्रभाकर त्रिपाठी, साहित्यकार गजाधर प्रसाद शर्मा गंगेश, डा. राम नारायण तिवारी, डा. कमल प्रकाश तिवारी, डा. त्रिभुवन नाथ वेणु, डा. रविशंकर सिंह, अजय कुमार सिंह, डा. विपिन चन्द्र झां, डा. देवप्रकाश राय, आनंद कुमार आदि ने अपने विचार प्रकट किये। संचालन संस्था के सचिव इं. संजीव गुप्ता ने किया।

मुहम्मदाबाद प्रतिनिधि के अनुसार हरिहरपुर के सेवानिवृत्त शिक्षक व कवि विन्ध्याचल राय 'अचल' (88) का गुरुवार को उनके निवास पर निधन हो गया। अंतिम संस्कार हरिहरपुर गंगा घाट पर किया गया। मुखाग्नि उनके इकलौते पुत्र अचलानन्द राय ने दी। नगर के इंटर कालेज से वर्ष 1985 में हिन्दी प्रवक्ता के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। श्री राय लेखन जगत में प्राध्यापक, अचल व कवि के नाम से जाने जाते थे। पंजाब विश्वविद्यालय से उन्होंने हिन्दी प्रभाकर की उपाधि ली थी। उन्होंने भोजपुरी उपन्यास सुन्नर काका, महतारी ममता क मूरत, ललित निबन्ध संग्रहकारी लउरिया चितकाबर हो व भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में गाजीपुर के रणबांकुरे आदि की रचना की थी। उनके कार्य कुशलता को देखते हुए भोजपुरी साहित्य मंडल बिहार ने 19 सितम्बर 1982, अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन ने 21 वें अधिवेशन सासाराम बिहार में 4-5 नवम्बर 06 को उन्हें सम्मानित किया। स्वामी सहजानन्द स्नातकोत्तर महाविद्यालय ने 14 सितम्बर 05, स्वामी सहजानन्द सरस्वती हितकारी समाज आरामबाग नई दिल्ली ने 21 फरवरी 2001 को सम्मानित किया। इसके अलावा गाजीपुर जनपद के शिक्षक, शिक्षाविद् व साहित्यकारों पत्रकारों ने शंकर कोल्ड स्टोरेज परिसर में 23 मई 2010 को सम्मानित किया। राजकुमार त्रिपाठी, रामायण सिंह यादव, वीरेन्द्र राय, शंकर दयाल राय, कपिल मुनी पंकज ने उनके निधन को साहित्य जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया।

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