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पंचायत चुनाव

0 अब तक नहीं कराया पिछले साल का ऑडिट

0 ढाई महीने का समय रह गया शेष

0 ऑडिट न होने पर नहीं मिलेगी एनओसी

राजेश शर्मा (झाँसी) : न आरक्षण का असर, न परिसीमन की बाधा और न वर्चस्व पर कोई सवाल। इसके बावजूद जनपद के 174 ग्राम प्रधानों के लिए दूसरी पारी खेलना कठिन हो सकता है। अगले ढाई महीने में यदि इन ग्राम पंचायतों ने ऑडिट नहीं कराया तो चुनाव से पहले ही यहाँ के प्रधान मैदान से बाहर हो जाएंगे।

ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। दावेदारों ने चुनावी तैयारियाँ शुरू कर दी हैं। इन्त़जार निर्वाचन आयोग की अधिसूचना का किया जा रहा है। चुनाव में कई नए दावेदार ताल ठोकेंगे तो अधिकांश मौजूदा प्रधान भी चुनावी महासंग्राम में उतरने को तैयार हैं। इनकी निगाह आरक्षण पर टिकी है, ताकि सीट में परिवर्तन न हो जाए और वह चुनाव लड़ने से पहले ही हालातों के आगे हार जाएं। पर जनपद के 174 ग्राम प्रधानों ने लापरवाही से यह संकट पैदा कर लिया है। यह वे ग्राम प्रधान हैं, जिन्होंने वर्ष 2019-20 का अब तक ऑडिट नहीं कराया है। दरअसल, लेखा परीक्षा विभाग ने मार्च में ऑडिट रोस्टर जारी कर दिया था। दिसम्बर माह तक जनपद की 496 ग्राम पंचायतों में से 332 ने ही अभिलेख उपलब्ध कराए, जबकि शेष 164 ग्राम पंचायतों ने ऑडिट में दिलचस्पी नहीं दिखाई। इससे पिछले साल की 10 ग्राम पंचायतों ने भी ऑडिट नहीं कराया, जिससे ऑडिट न कराने वाली ग्राम पंचायतों की संख्या 174 पहुँच गई है। इसके नियम पर गौर करें - प्रत्येक ग्राम पंचायत को हर वर्ष ऑडिट कराना होता है। लेखा परीक्षा विभाग द्वारा प्रत्येक ग्राम पंचायत को ऑडिट का कार्यक्रम भेज दिया जाता है। इसके अनुसार ग्राम पंचायतों को वर्षभर का लेखा-जोखा देना होता है। लेखा परीक्षा विभाग द्वारा अगर आपत्तियाँ लगाई जाती हैं तो समय पर उनका निराकरण करना भी अनिवार्य होता है। पंचायत चुनाव से पहले ग्राम प्रधानों को ़िजला पंचायत राज विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना होता है। यह एनओसी तभी मिलती है, जब ग्राम पंचायत पर कोई बकाया न हो और हर वर्ष ऑडिट कराया गया हो। ऑडिट की आपत्ति का निराकरण न होने की दशा में भी एनओसी नहीं दी जाती है और यहाँ के प्रधान चुनाव नहीं लड़ सकते हैं। ऐसे में ऑडिट न कराने वाली ग्राम पंचायतों के पास अब केवल ढाई माह का ही समय बचा है, लेकिन ग्राम पंचायतों पर अब प्रशासक काबिज हो गए हैं, इसलिए इस कम समय में प्रधानों के लिए ऑडिट कराना बड़ी चुनौती बन गया है।

बबीना की 10 ग्राम पंचायतों ने 2 साल से जमा नहीं किया लेखा-जोखा

ऑडिट कराने में सबसे अधिक लापरवाही बड़ागाँव व बबीना ब्लॉक के गाँव बरत रहे हैं। बबीना ब्लॉक की 10 ग्राम पंचायतों ने तो 2 वर्ष से लेखा-जोखा प्रस्तुत नहीं किया है। लेखा परीक्षा विभाग के अनुसार सफा, खजराहाखुर्द, रसोई, चमरौआ, पृथ्वीपुरानया खेड़ा, लहरठकुरपुरा, सुकुवाँ सरवाँ, सिमिरिया, ठकरपुरा ने वर्ष 2018-19 में भी ऑडिट नहीं कराया था। इन प्रधानों के लिए चुनाव में जाना अब मुश्किल हो जाएगा।

फोटो हाफ कॉलम

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इन्होंने कहा

'जनपद की 174 ग्राम पंचायतों ने अब तक ऑडिट कराने के लिए लेखा परीक्षा विभाग को अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए हैं। ऑडिट नहीं कराने तथा वसूली की राशि जमा नहीं करने पर डीपीआरओ द्वारा एनओसी नहीं दी जाती है, जिससे सम्बन्धित ग्राम पंचायत के प्रधान चुनाव नहीं लड़ सकते हैं।'

0 अश्विनी शुक्ला

़िजला सहायक लेखा परीक्षा अधिकारी

फाइल : राजेश शर्मा

14 जनवरी 2021

समय : 4.45 बजे

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