श्रीनगर, नवीन नवाज: पिछले पांच वर्षों के दौरान देश-विदेश में पढ़ाई व रोजगार के लिए गए कश्मीर के छात्रों व अन्य लोगों की मौजूदा स्थिति का ब्योरा जुटाया जा रहा है। यह कदम हाल ही में दिल्ली, पंजाब, बिहार समेत देश के विभिन्न राज्यों में कश्मीरी आतंकियों के फैले नेटवर्क और विदेश में बैठे कुछ कश्मीरी युवकों द्वारा घाटी में आतंकी नेटवर्क की मदद करने के मामलों का पता चलने के बाद उठाया गया है।

बीते एक माह के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने पंजाब, दिल्ली और बिहार से करीब सात युवकों को पकड़ा है। इसके अलावा विदेश से भी बीते 25 दिनों में दो युवकों को लाया गया है। विभिन्न सरकारी व गैर सरकारी एजेंसियों के मुताबिक, इस समय करीब 20 हजार कश्मीरी युवक-युवतियां देश के विभिन्न हिस्सों के अलावा विदेश में भी पढ़ाई कर रहे हैं। इतनी ही संख्या में कश्मीरी युवक विभिन्न मुल्कों में रोजगार के लिए गए हैं।

जिहादी तत्वों का मजबूत नेटवर्क : पाकिस्तान, बांग्लादेश, दुबई, ईरान, इराक, थाईलैंड, मलेशिया, कुवैत, कतर, तुर्की और कुछ अफ्रीकी मुल्कों को जाने वाले कश्मीरी युवकों के बारे में सुरक्षा एजेंसियों ने जांच शुरू की है। इन मुल्कों में जिहादी तत्वों का एक मजबूत नेटवर्क है। इधर, कश्मीर से बाहर देश के भीतर दिल्ली, हैदराबाद, बेंगलुरु, महाराष्ट्र और पंजाब के विभिन्न शहरों में पढ़ाई के लिए गए कश्मीरी युवकों के बारे में भी गहनता से पड़ताल की जा रही है। उत्तर प्रदेश, बिहार, केरल, महाराष्ट्र व गुजरात के मदरसों में जाने वाले युवकों के बारे में भी पता किया जा रहा है।

कई राज्यों की पुलिस से भीर मदद ली जा रही : कश्मीर में तैनात केंद्रीय खुफिया एजेंसी के एक अधिकारी के अनुसार, आतंकियों से हुई पूछताछ के दौरान कुछ खास राज्यों व शहरों को चिन्हित किया गया है, जहां पढ़ाई के लिए गए कश्मीरी छात्रों का ब्योरा जुटाया जा रहा है। इसके लिए संबंधित राज्यों की पुलिस व संबंधित प्रशासन की मदद ली जा रही है। इंटरनेट मीडिया पर उनके एकाउंट की भी जांच की जाएगी। बता दें, पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ इंटरनेट मीडिया के जरिए देश- विदेश में बैठे कश्मीरी नौजवानों से संर्पक साध उन्हेंं अपने मंसूबों को आगे बढ़ाने के लिए तैयार कर रही है। एक वरिष्ठ अधिकारी नेे बताया कि श्रीनगर में गत दिनों हुई एक उ'चस्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक में भी इस विषय पर चर्चा हुई है। ऐसे सभी विद्याॢथयों की सूची तैयार की जा रही है जो कभी किसी राष्ट्रविरोधी गतिविधि या फिर पत्थरबाजी में लिप्त रहे हैं। नाबालिग होने के कारण या फिर पुनर्वास के नाम पर कानून के शिकंजे से बच निकलने वालों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है।

कुछ मामले

  • जालंधर में 2018 में बीटेक कर रहे तीन कश्मीरी छात्रों जाहिद गुलजार, मोहम्मद इद्रीस और यूसुफ रफीक को पकड़ा गया था। तीनों अंसार गजवात-उल-हिंद से जुड़ हुए थे। इनके पास से हथियार भी मिल थे।
  • 2020 में भी दिल्ली के अलावा उत्तर प्रदेश में भी कश्मीरी छात्रों को आतंकी गतिविधियों के आरोप में पकड़ा गया था।
  • हाल में जम्मू में पकड़े गए आतंकी संगठन लश्कर-ए-मुस्तफा के कमांडर हिदायतुल्ला मलिक की निशानदेही पर बिहार, चंडीगढ़ और दिल्ली से कश्मीरी छात्र पकड़े गए हैं। इनमें एक बिहार का भी युवक है।

पढ़ाई के लिए पासपोर्ट लेकर गए और आतंकी बन गए : कुछ कश्मीरी छात्र अचानक कश्मीर से गायब हुए और पाकिस्तान पहुंच गए। इनमें एक ने वहीं पर एमबीबीएस कालेज में दाखिला लिया और आज अल-बदर के नामी कमांडरों में एक है। इसका नाम अरजमंद है और पाकिस्तान से ही कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को अंजाम दे रहा है। फरवरी, 2019 में बारामुला में पुलिस ने अब्दुल मजीद बट और मोहम्मद अशरफ मीर नाम के लश्कर के दो आतंकियों को पकड़ा था। यह पासपोर्ट के आधार पर पढ़ाई के लिए घर से गए थे और पाकिस्तान के जिहादी ट्रेनिंग कैंप में पहुंच गए थे। 2019 मेंं बारामुला में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया लश्कर आतंकी सहुैब अखूर भी 2018 में पाकिस्तान गया था। कुलगाम का रहने वाला सैफुल्ला गाजी भी पासपोर्ट लेकर पाकिस्तान के जिहादी कैंप में पहुंचा था।

विदेश से चला रहे आतंकी नेटवर्क : इस महीने की शुरुआत में पुलिस ने कतर से जैश के एक ओवरग्राउंड वर्कर मुनीब सोफी को लाया है। बिजबिहाड़ा का रहने वाला मुनीब दक्षिण कश्मीर में सक्रिय जैश के लिए हथियार, पैसे व अन्य साजो सामान का इंतजाम करता था। गत बुधवार को जम्मू कश्मीर पुलिस ने गजनवी फोर्स नामक आतंकी संगठन के एक हैंडलर शेर अली को पकड़ा है। जम्मू संभाग के जिला पुंछ का रहने वाला शेर अली कुवैत से आतंकी नेटवर्क चला रहा था। 

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