संजीव कुमार मिश्र, नई दिल्ली

12वीं पास प्रेमलता पढ़ाई जारी रखना चाहती थी, लेकिन शादी के बाद पारिवारिक दायित्वों के चलते ऐसा मुमकिन नहीं हो सका। प्रेमलता पर उस समय विपत्ति का पहाड़ टूट पड़ा जब अचानक उनके पति की मृत्यु हो गई। प्रेमलता नौकरी कर बच्चों का पालन पोषण करना चाहती थी, लेकिन पढ़ाई कम होने के चलते नौकरी भी नहीं मिली। ऐसी ही सैकड़ों महिलाओं को पढ़ाई पूरी न होने के चलते जिंदगी में इस तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। मझधार में फंसी इन महिलाओं की जिंदगी को पार लगा रही हैं करोल बाग की सुमैया आफरीन। वे न केवल शादीशुदा, विधवा व घरेलू सहायिका का काम कर रही महिलाओं को शिक्षित करती हैं, बल्कि उन्हें अंग्रेजी समेत कंप्यूटर शिक्षा भी देती हैं।

विधवा महिला के साक्षात्कार ने बदली जिंदगी

सुमैया आफरीन कहती हैं कि समाज में लैंगिक भेदभाव पर आइआइएम अहमदाबाद में एक रिसर्च प्रजेंटेशन था। इस दौरान दिल्ली में ही एक विधवा का साक्षात्कार लिया गया। उसने पढ़ाई नहीं की थी। पांच बच्चे थे। अचानक पति की मौत से उनकी जिंदगी बिखर गई थी, लेकिन उनके सामने दिक्कत थी कि वे अपनढ़ थीं। किसी तरह छोटे-मोटे काम कर वे परिवार का गुजर बसर करती थीं। इस साक्षात्कार की घटना ने सुमैया की जिंदगी का मकसद बदल दिया। उन्होंने करोलबाग समेत मध्य दिल्ली की ऐसी शादीशुदा व विधवा महिलाओं को पढ़ाने का निर्णय लिया, जिनकी शादी के बाद पढ़ाई रुक गई। सुमैया और राहुल गोस्वामी ने मिलकर लक्ष्य जीवन जागृति संस्था शुरू की।

अंग्रेजी व कंप्यूटर शिक्षा पर जोर

सुमैया कहती हैं कि सन् 2009 में करोल बाग में एक छोटे से कमरे से उन्होंने महिलाओं को शिक्षित करने की शुरुआत की। तब महिलाएं सेंटर तक आने में संकोच करती थीं। हमने मध्य दिल्ली की पांच हजार महिलाओं पर सर्वे किया। इसमें 90 फीसद महिलाओं ने माना कि शादी के बाद उनकी पढ़ाई का सिलसिला थम गया, लेकिन वे परिवार के लिए कुछ करना चाहती हैं। सुमैया ने घर-घर जाकर न केवल महिलाओं, बल्कि परिजनों को किसी तरह राजी किया। सुमैया कहती हैं कि अब तक करीब 6000 से ज्यादा महिलाएं अंग्रेजी, कंप्यूटर, ¨हदी व बेसिक शिक्षा समेत स्किल ट्रेनिंग यहां से ले चुकी हैं। इनमें से कई तो अच्छी कंपनियों में नौकरी कर रही हैं, जबकि कई महिलाएं घर पर ही ट्यूशन पढ़ा कर पैसे कमा रही हैं। एक ऐसी ही बुजुर्ग महिला के बारे में बताते हुए सुमैया भावुक हो जाती हैं। वे कहती हैं कि बसंती करोल बाग में रहती है। उनके दोनो बेटे अमेरिका में रहते हैं। बच्चे अंग्रेजी में बात करते तो उन्हें समझ नहीं आता था। उन्हें अंग्रेजी और स्काइप समेत कंप्यूटर की जानकारी लेनी थी, लेकिन उम्र अधिक होने के कारण वे संकोच करती थीं। हालांकि बाद में किसी के सुझाव से वे यहां आई और करीब तीन महीने में अंग्रेजी समेत कंप्यूटर चलाने का प्रशिक्षण लिया। शादीशुदा महिलाओं को दोपहर में ही समय मिलता है। इसलिए सेंटर में सुबह 10 से 1 बजे तक और शाम में छह बजे से आठ बजे तक महिलाओं को स्किल ट्रेनिंग दी जाती है।

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