गुरुवार को सुबह 10 बजे पुराना गोरखपुर कब्रिस्तान में होंगे दफन

- हिंदी, उर्दू व अंग्रेजी भाषा पर था समान अधिकार

जागरण संवाददाता, गोरखपुर : उर्दू के मशहूर शायर शबनम गोरखपुरी (असली नाम-मसीहुज्जमां ) का बुधवार को यहा निधन हो गया। वह 76 वर्ष के थे तथा लंबे समय से अस्थमा से पीड़ित थे। परिवार में बेटी, दामाद और दो नाती है।

उनका पार्थिव शरीर महानगर के दुर्गाबाड़ी स्थित मोहल्ला रुद्रपुर स्थित घर पर रखा है। शबनम गोरखपुरी को गुरुवार को सुबह 10 बजे गोरखनाथ जामा मस्जिद कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा, जबकि नमाज-ए-जनाजा सुबह 9 बजे उनके आवास पर होगी।

शबनम गोरखपुरी हिंदी, उर्दू व अंग्रेजी भाषा पर समान अधिकार रखते थे। देश के विभिन्न राज्यों में होने वाले मुशायरों व कवि सम्मेलनों में अपनी बेहतरीन शायरी व दिलों को छू जाने वाली गजलों को सुनाकर उन्होंने गोरखपुर का नाम रोशन किया है। उन्होंने फिल्मों के लिए भी गीत लिखे।

रचनाएं

शबनम ने अपने जीवन में कई किताबें लिखी। 'फूल और शबनम' उनकी पहली किताब थी। अश्क-ए-शबनम, बज्म-ए-शबनम, 'फूट कांटों की सेज पर' 'वाद-ए- मगरिब' सहित कई रचनाएं हैं। उन्होंने अंग्रेजी साहित्यकार काल रिच एवं किट्स की कविताओं का उर्दू में अनुवाद किया। 'बूढ़ा जहाजरां' किताब ब्रिटेन के राजकीय पुस्तकालय में रखी गई है, जिसके लिए ब्रिटेन की तत्कालीन प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर ने उन्हें प्रशंसा पत्र दिया था।

खुद में किताब थे शबनम

उनके निधन पर गोरखपुर विवि के उर्दू विभाग के पूर्व अध्यक्ष डा. रजीउर्रमान ने कहा कि उनके निधन से उर्दू शायरी के क्षेत्र में अपूरणीय क्षति हुई है। शायर राज आजमी, अनवर जिया कहते हैं कि शबनम खुद में एक किताब थे। अफरान, डा. बदरेआलम, डा. साजिद हुसैन, हमीद अहसन, नबीउल्लाह, नदीम, रिजवान सहित बड़ी संख्या में लोगों ने शोक व्यक्त किया है।

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