यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 07, 2011 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
दिल्ली के स्मारक संकट में

नई दिल्ली, जागरण संवाददाता
स्मारकों के संरक्षण के लिए जिस सरकार ने कानून बनाया, उसी के विभाग उसकी धज्जियां उड़ा रहे हैं। एक आरटीआई के तहत सरकार से मांगी गई सूचना में यह खुलासा हुआ है। मामला प्रकाश में आने पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने विभिन्न सरकारी एजेंसियों को नोटिस जारी किया है तथा इसकी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। स्मारकों के संरक्षण के लिए बने कानून के अनुसार किसी भी स्मारक के 300 मीटर की दूरी तक निर्माण करना गैरकानूनी है।
राजधानी में 174 स्मारक ऐसे हैं जिन्हें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने राष्ट्रीय स्मारक माना है। ये सभी स्मारक एएसआई की संरक्षित स्मारकों की सूची में हैं।
दिल्ली भर में ऐसे 311 अवैध निर्माण किए गए हैं, जिनके बारे में एएसआई से अनुमति नहीं ली गई है। एएसआई के मुताबिक इसमें 30 के करीब निर्माण विभिन्न सरकारी एजेंसियों द्वारा किए गए हैं। इसमें नगर निगम, लोक निर्माण विभाग, केंद्रीय लोक निर्माण विभाग, एनडीएमसी, दिल्ली मेट्रो रेल कार्पोरेशन, दिल्ली जल बोर्ड, एमटीएनएल, उत्तर रेलवे आदि शामिल हैं।
इस संबंध में आरटीआई एक्टिविस्ट गोपाल प्रसाद ने आरटीआई लगाई थी। गोपाल प्रसाद कहते हैं कि चिंता की बात है कि सरकारी एजेंसियां ही नियमों की धज्जियां उड़ा रही हैं।
जिन स्मारकों के आसपास हुआ अवैध निर्माण
जंतर मंतर 16, कुतुबमीनार 2, पुराना किला 4, कोटला मस्जिद 1, काले खां मकबरा 6, खिड़की मस्जिद 33, सराय शाहजी 8, लाल गुम्बद 25, जफर महल 21, लालकिला 20, नजफ खान का मकबरा 4, सफदरजंग का मकबरा 4, चार मीनार 3, फिरोजशाह का किला 8, कोटला मुबारकपुर 1, बाग-ए-आलम 4, बेगमपुर मस्जिद 8 और जहाज महल में 14 निर्माण शामिल हैं।
वी.के. शुक्ला
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