लखनऊ [जागरण ब्यूरो]। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर के निदेशक प्रो. संजय गोविंद धांडे ने कहा सत्तर के दशक में मुंबई में टैक्सी चलाने वाले 'भैया' और खाड़ी देशों में कामगारों की आपूर्ति करने वाला उप्र बेंगलूर, हैदराबाद से लेकर अमेरिका के कैलिफोर्निया और न्यू जर्सी में इंजीनियर, डॉक्टर, शिक्षक और वैज्ञानिक निर्यात कर रहा है। उप्र के 'भैया' का यह नया अवतार है जिनकी प्रतिभा का इस्तेमाल घर को संवारने में किया जाना चाहिए।

जागरण फोरम में 'समकालीन चिंतन : उत्कृष्टता की खोज' विषय पर आयोजित सत्र में उन्होंने कहा कि प्रतिष्ठित शैक्षिक संस्थानों से भरपूर उप्र का दक्ष मानव संसाधन देश के दूसरे सूबों से लेकर विदेश में नाम कमा रहा है, लेकिन अपने घर में उसकी पूछ नहीं है। उनके मुताबिक वह शिक्षा व्यवस्था विफल है जो लोगों को रोजगार नहीं दिला पाती। समस्या है यह कि उप्र को जो नहीं चाहिए, उसे वह पैदा कर रहा है। जो चाहिए, वह नहीं। राज्य में शिक्षण संस्थानों की संख्या बढ़ रही लेकिन उनकी गुणवत्ता घट रही है। शिक्षण संस्थानों की आर्थिक, प्रशासनिक व शैक्षिक समस्याओं को दूर करने की जरूरत है। इसकी भी आवश्यकता है कि ज्ञान को संपदा के सृजन के जरिये के रूप में विकसित किया जाए।

शिक्षा में सुधार के पांच सूत्र

पांचवीं से आठवीं कक्षाओं में व्यावहारिक विषयों की शिक्षा दी जाएं।

नौवीं से बारहवीं में तकनीकी और प्रोफेशनल विषय शामिल किये जाएं।

हर जिले में हो एक विश्वविद्यालय

शिक्षा के लिए क्वालिटी फ्रेमवर्क बनाकर लागू करे सरकार

हर विश्वविद्यालय में हों इनोवेशन और इन्क्यूबेशन सेंटर।

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