लखनऊ [जागरण ब्यूरो]। राज्यसभा के पूर्व महासचिव योगेंद्र नारायण ने लोकतंत्र में जनता के खोये हुए विश्वास की बहाली को देश के सामने बड़ी चुनौती बताया है। उनके मुताबिक विश्वास की बहाली की सबसे ज्यादा जिम्मेदारी निर्वाचित जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों पर है।

जागरण फोरम में 'समकालीन चिंतन: उत्कृष्टता की खोज' विषय पर आयोजित सत्र में उन्होंने कहा भ्रष्टाचार की दीमक कार्यपालिका को चाटने के बाद अब विधायिका व न्यायपालिका में भी फैल रही है। असली भ्रष्टाचार जिला स्तर पर होता है। इस पर अंकुश लगाने के लिए जिला स्तरीय लोकायुक्त होने चाहिए जिन्हें भ्रष्टाचार की जांच का अधिकार भी हो। सरकार को कामकाज में विशेषज्ञों की सेवाएं लेनी चाहिए। आर्थिक मामलों में मुख्यमंत्री को सुझाव देने के लिए एक स्वतंत्र आर्थिक सलाहकार परिषद गठित होनी चाहिए। हर विभाग में भी संबंधित क्षेत्रों के विशेषज्ञों की सलाहकार परिषद होनी चाहिए।

उप्र में फंड की कमी नहीं है। चुनौती संसाधनों के सही इस्तेमाल, योजनाओं के कारगर क्रियान्वयन और नियोजन की है। ऊर्जा के क्षेत्र में भी विकेंद्रीकृत नियोजन अपनाने की जरूरत है। बिजली संकट से निजात पाने के लिए चीन की तर्ज पर उप्र में भी कम क्षमता की मॉडल माइक्रो हाइडल परियोजनाएं स्थापित की जा सकती हैं। नौकरशाही को कामकाज में स्वतंत्रता दी जानी चाहिए और सत्ताधारी दलों को उस पर राजनीतिक एजेंडे थोपने से परहेज करना चाहिए। लोकतंत्र की राह में रोड़े अटकाने वाली राजनीतिकों तथा नौकरशाहों की सामंतवादी मानसिकता में भी बदलाव लाने की जरूरत है।

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