लखनऊ [जासं]। देश के जाने-माने हृदय रोग के विशेषज्ञ और मेदांता मेडिसिटी के चेयरमैन डॉ. नरेश त्रेहन ने 'फोरम' में गांव तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने की परिकल्पना को सुझावों के साथ प्रस्तुत किया। उनका कहना था प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाएं अच्छी की जा सकती हैं। इसके लिए आशा कार्यकत्रियों को इसके लिए हथियार बनाया जा सकता है। उन्हें और प्रशिक्षित करके गांवों में बीमारी का बोझ कम किया जा सकता है।

डॉ. त्रेहन ने हीरो कॉर्प के सहयोग से सोनीपत (हरियाणा) में अपनाए जा रहे एक मॉडल का प्रस्तुतिकरण भी किया। इसमें आधुनिक सुविधाओं से लैस सचल सेवा को गांव व अस्पतालों से जोड़ा गया है। उत्तर प्रदेश में भी यह मॉडल अपनाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में सरकारी अस्पतालों की तुलना में निजी अस्पतालों में डॉक्टरों की संख्या सात गुना ज्यादा है। यह स्थिति राज्य सरकार के लिए चुनौती है। हालांकि पीपीपी मॉडल से यह तस्वीर बदली जा सकती है।

डॉ. त्रेहन ने कहा स्वास्थ्य सुविधाओं का सार्थक पक्ष यह है कि देश में विकसित देशों की तुलना में सस्ता और गुणवत्तापरक इलाज उपलब्ध है। यही कारण है कि यहां 55 देशों से लोग अपना इलाज कराने आते हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि डॉक्टरों के प्रति विश्वास में लगातार कमी आई है। लोगों में अपने प्रति विश्वास पैदा करने की चिकित्सकों को जरूरत है। उन्होंने बताया कि अभी देश में सिर्फ 20 प्रतिशत लोगों को ही सरकारी चिकित्सालयों में इलाज उपलब्ध है। 14 प्रतिशत लोगों निजी अस्पतालों में जाते हैं। स्वास्थ्य बीमा के प्रति जागरूकता में कमी के मोर्चे पर अभी लड़ना बाकी है।

मोबाइल पर ताजा खबरें, फोटो, वीडियो व लाइव स्कोर देखने के लिए जाएं m.jagran.com पर