फोर्टएलिजा। फीफा विश्व कप इतिहास में हमने खिलाडि़यों के कई अजीबोगरीब रूप देखे हैं। चाहे वो रोनाल्डो और रूनी के बीच हुई हाथापाई हो या फिर 2006 विश्व कप फाइनल में फ्रांस के जिनेडीन जिडान द्वारा इटली के एक खिलाड़ी पर सिर से किया गया घातक वार..खिलाड़ी अपनी गलत हरकतों से कहीं ना कहीं सुर्खियां बटोरते आए हैं लेकिन अगर कोई खिलाड़ी मैदान पर विरोधी खिलाड़ियों पर अपने दांतों से वार करने लगे यानी उन्हें काटने लगे तो आप इसे क्या कहेंगे? ऐसा ही कुछ हुआ मंगलवार की रात उरुग्वे और इटली के बीच हुए रोमांचक मुकाबले में।

शिकार थे इटली के जियोर्जियो शिलेनी और वार करने वाले थे उरुग्वे के दिग्गज स्ट्राइकर लुइस सुआरेज। सुआरेज ने मैच के 79वें मिनट में एक कॉर्नर किक के दौरान विरोधी गोल के करीब डिफेंडर के रूप में तैनात इटली के चिलेनी को कंधे पर काट लिया और उसके बाद खुद मैदान पर लेटते हुए इसे महज एक हादसे का रूप देने की कोशिश की। शायद सुआरेज ये भूल गए थे कि मैदान में चारों तरफ कैमरे उन पर निगाहें रखे हुए हैं और इसके परिणाम बेहद खराब हो सकते हैं।

क्या सुआरेज हैं 'बाइटिंग मैन'?

वैसे, आपको बता दें कि सुआरेज एक तरह से फुटबॉल के मैदान में 'बाइटिंग मैन' (काटने वाला इंसान) के तौर पर मशहूर होते जा रहे हैं। दरअसल, ये पहला मामला नहीं है जब सुआरेज ने इस तरह की हरकत की है। इससे पहले भी दो बार उन्हें ऐसी हरकत के लिए निलंबन तक झेलना पड़ा है। साल 2010 में नीदरलैंड्स की एक लीग में अजैक्स क्लब के लिए खेलते हुए उन्होंने पीएसवी टीम के मिडफील्डर ओटमैन बकल को काटा था जिसके बाद उन्हें सात मैचों के निलंबन का सामना करना पड़ा था। वहीं, पिछले साल उन्होंने चेल्सी क्लब के ब्रानिस्लाव इवानोविक को भी काटा था जिसके बाद उन्हें 10 मैचों का निलंबन झेलना पड़ा था। अब देखना यही होगा कि फीफा विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में ऐसी हरकत करने पर फीफा उन पर क्या कार्रवाई करती है। अगर इस बार उनका निलंबन हुआ तो जाहिर तौर पर आगे के राउंड में उरुग्वे की टीम को मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा क्योंकि सुआरेज उनके सबसे इन फॉर्म खिलाड़ी हैं।

फीफा लेगा एक्शन, बिठाई जांच:उधर, फीफा ने लुइस सुआरेज के खिलाफ आधिकारिक तौर पर आरोप को स्वीकार किया है और ऐलान किया है कि मैच के ठीक बाद फीफा की अनुशासनात्मक समिति ने मामले की जांच शुरू कर दी है। फीफा के मुताबिक अगर सुआरेज दोषी पाए जाते हैं तो उन पर 2 मैचों काप्रतिबंध से लेकर 24 महीनों के प्रतिबंध लगाया जा सकता है। फीफा ने अपनी जांच समिति को आदेश दिया है कि नतीजे शनिवार से पहले सामने रखे जाएं ताकि उरुग्वे और कोलंबिया के बीच होने वाले अंतिम-16 राउंड के मुकाबले से पहले कार्रवाई की जा सके।

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