मास्को। भारतीय ग्रैंडमास्टर विश्वनाथन आनंद ने आज विश्व शतरंज चैंपियनशिप के तनाव भरे रेपिड गेम टाईब्रेकर में इस्राइल के बोरिस गेलफेंड को हराकर लगातार चौथी और कुल पांचवीं बार विश्व खिताब जीता। आनंद को उनकी इस कामयाबी पर भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी बधाई दी है। वहीं, अखिल भारतीय शतरंज संघ ने आनंद को भारत रत्‍‌न देने की अपनी मांग एक बार फिर दोहराई है।

आनंद ने रेपिड शतरंज टाईब्रेकर में गेलफेंड को 2.5-1.5 से हराया। बारह बाजियों की इस विश्व चैंपियनशिप में मुकाबला 6-6 से बराबर रहा था जिसके बाद नतीजे के लिए टाईब्रेकर का सहारा लिया गया। टाईब्रेकर की पहली बाजी 33 चाल के बाद ड्रा पर समाप्त हुई लेकिन 42 वर्षीय आनंद ने दूसरी बाजी में गेलफेंड को 77 चाल में हराकर बढ़त बना ली। चार गेम के रेपिड टाईब्रेकर की अंतिम दो बाजी भी ड्रा रही जिससे आनंद ने लगातार तीसरी बार अपने विश्व खिताब की सफलतापूर्व रक्षा की। आनंद का यह कुल पांचवां और लगातार चौथा विश्व चैंपियनशिप खिताब है। इस दिग्गज भारतीय ने अपना पहला विश्व खिताब वर्ष 2000 में जीता था जिसके बाद वह 2007, 2008 और 2010 में लगातार तीन बार विश्व चैम्पियन बनने में सफल रहे। वह 2007 से विश्व चैंपियन हैं। आनंद को इस 25 लाख 50 हजार डालर इनामी प्रतियोगिता से 55 प्रतिशत यानी लगभग 14 लाख डालर की राशि मिलेगी। बाकी राशि गेलफेंड के हिस्से में आएगी। भारत के इस दिग्गज खिलाड़ी ने 2007 में विश्व चैंपियनशिप आठ खिलाड़ियों के बीच टूर्नामेंट प्रारूप में जीती थी। आनंद ने प्रतियोगिता का प्रारूप गत चैम्पियन और चैलेंजर के बीच चैंपियनशिप मैच के रूप में बदले जाने के बाद वर्ष 2008 और 2010 में क्रमश: रूस के व्लादिमीर क्रैमनिक और बुल्गारिया के वेसलिन टोपालोव को हराकर खिताब जीता था।

आनंद ने कहा, 'मैं बहुत राहत महसूस कर रहा हूं क्योंकि यह मैच किसी के भी पक्ष में जा सकता था। मैं वास्तव में तनाव में था। जब मैं सुबह उठा तो मैं जानता था कि अब किसी एक की जीत होगी लेकिन किस की होगी मैं नहीं जानता था। दोनों तब बराबरी पर थे और कोई भी जीत सकता था। मैंने कभी खुद को खिताब का प्रबल दावेदार नहीं माना था। मैंने 2009 के बाद से ही इसके बारे में सोचना शुरू कर दिया था लेकिन तब मुझे पता नहीं था कि मेरा मुकाबला बोरिस से होगा। मैं काफी लंबे समय से बोरिस को जानता हूं और जिस तरह से वह क्वालीफाईंग दौर में कड़ी परीक्षा से गुजरे थे उससे उनका मनोबल बढ़ा हुआ था।' आनंद ने हालांकि स्वीकार किया कि पहली छह बाजी ड्रा छूटने के बाद जब सातवीं बाजी में गेलफेंड ने उन्हें हरा दिया वह उनके लिए करारा झटका था। उन्होंने उस दिन को खुद के लिए काला दिवस बताया। आनंद ने कहा, 'मेरे लिए यह अलग तरह का मुकाबला था लेकिन आज मैंने अपना धैर्य बनाए रखा। मैं इससे पहले सातवीं बाजी में हारने से सकते में पड़ गया था। वह मेरे लिए काला दिन था। मेरे लिए वापसी करना बहुत जरूरी थी। आठवीं बाजी में जीत से मेरा मनोबल बढ़ा। वह मेरे लिए बेहद महत्वपूर्ण जीत थी।' भारतीय खिलाड़ी ने बीच में कहा था कि वह अपनी रणनीति का खुलासा नहीं करेंगे लेकिन अब जबकि चैंपियनशिप समाप्त हो गई है तब उनसे रणनीति का खुलासा करने के लिए कहा गया। आनंद ने जीत का श्रेय अच्छी तैयारियों को दिया। उन्होंने मास्को आने से पहले इस मुकाबले के लिए काफी तैयारियां की थी और गेलफेंड के कई मैचों का गहन अध्ययन किया था। उन्होंने कहा, 'मुझे शुरू से ही पता था कि यह कड़ा मुकाबला होगा। मैंने बोरिस के कई मैचों का अध्ययन किया। मुझे पता था कि वह कड़ी चुनौती पेश करेगा। शुरू में मुकाबला संतुलित था क्योंकि इस तरह के मैचों में एक गलती गहरा प्रभाव डाल सकती है। मैंने सातवीं बाजी में भी आखिर तक कोशिश की थी लेकिन मुझे खुशी है कि अगली बाजी में मैं वापसी करने में सफल रहा। इसके बाद 12वीं बाजी में भी स्थिति दिलचस्प थी लेकिन हर बार बोरिस ने जोरदार वापसी की। उसकी प्रतिक्रिया बहुत अच्छी थी।'

दूसरी तरफ इस्राइल के गेलफेंड ने कहा कि उन्होंने ठोस प्रदर्शन किया। उन्होंने अपनी रणनीति के बारे में कहा, 'मैंने एक बार में एक बाजी पर ध्यान दिया। मैंने अपनी तरफ से सर्वश्रेष्ठ चाल चली और मुझे जो वैरीएशन सही लगी वही अपनाई। मैंने वही चाल चली जिसमें अधिक संभावना थी। मैंने अपनी तरफ से भरसक प्रयास किए। मैंने अपनी तरफ से ठोस प्रदर्शन किया। टाईब्रेक में मेरी रणनीति गलतियों से बचने की थी लेकिन बाकी मैचों की तरह मैं कुछ अवसरों पर अपनी सर्वश्रेष्ठ चाल नहीं चल पाया। इस तरह के बड़े मुकाबलों में ऐसी संभावना होती है।' बोरिस ने कहा कि आनंद के पिछले तीन बार खिताब जीतने के बावजूद वह दबाव में नहीं थे। उन्होंने कहा, 'शुरू में दोनों का पलड़ा समान था। मैं कुछ बाजियाें में पीछे रहा लेकिन मैंने अच्छी वापसी की। मैंने उनकी चालों का अच्छा तोड़ निकाला था।'

प्रधानमंत्री, सोनिया ने आनंद को बधाई दी

नई दिल्ली। पूरे राष्ट्र ने ग्रैंडमास्टर विश्वनाथन आनंद को विश्व चैंपियनशिप का खिबात बरकरार रखने पर आज सैल्यूट किया। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से लेकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी तक सभी ने शतरंज के इस महान खिलाड़ी को बधाई दी और उन्हें युवाओं का प्रेरणास्रोत करार दिया। प्रधानमंत्री ने आनंद को भेजे बधाई संदेश में कहा, 'आप देश के युवाओं विशेषकर खेलों में दिलचस्पी रखने वालों के लिए बड़ा प्रेरणास्रोत हो। आपने अपनी इस बड़ी उपलब्धि से देश का सिर गर्व ऊंचा कर दिया।' प्रधानमंत्री ने आनंद को भविष्य में अधिक सफलताएं अर्जित करने की शुभकामना दी। सोनिया गांधी ने आनंद को 'विलक्षण' करार दिया। उन्होंने अपने संदेश में कहा, 'आनंद ने भारत का मान बढ़ाया है। उनका लगातार चौथी बार खिताब जीतना वास्तव में बेमिसाल है।'

आनंद को भारत रत्न देने का आग्रह

चेन्नई। अखिल भारतीय शतरंज महासंघ [एआईसीएफ] ने विश्वनाथन आनंद को भारत रत्न देने की अपनी मांग दोहराई जिन्होंन मास्को में अपना पांचवां विश्व शतरंज खिताब जीता। एआईसीएफ अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर ने कहा, 'इस शानदार मौके पर, हम भारत सरकार से आग्रह करते हैं कि विश्वनाथन आनंद को भारत रत्न देकर सम्मानित करें। हमारा आग्रह केंद्र सरकार के पास लंबित है और आनंद के एक बार फिर खुद को निर्विवाद विश्व चैम्पियन के रूप में स्थापित करने के बाद वह इस प्रतिष्ठित पुरस्कार का हकदार है।' प्रभाकर ने कहा, 'हम उम्मीद करते हैं कि आनंद को इस बार भारत रत्न से सम्मानित किया जाएगा। इस मौके पर हम तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता का भी धन्यवाद करते हैं जिन्होंने विश्व चैंपियनशिप की चेन्नई में मेजबानी की पेशकश की थी।'

आनंद के पिछले चार विश्व खिताब

फीडे विश्व चैंपियन 2000-2001 [नई दिल्ली और तेहरान]

आनंद ने पहला खिताब नॉकआउट प्रारूप में जीता था। इसमें शुरुआत में 128 खिलाड़ी थे। आनंद ने नई दिल्ली में खुद को आगे रखा। उनका फाइनल स्पेन के एलेक्सी शिरोव के साथ था। छह बाजियों का फाइनल केवल चार बाजियों तक चला। आनंद ने ईरान की राजधानी तेहरान में खेले गए फाइनल में तीन बाजियां जीतीं, जबकि एक ड्रॉ कराई। आनंद यह प्रतिष्ठित खिताब जीतने वाले पहले भारतीय बने।

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विश्व चैंपियन 2007 [मैक्सिको सिटी]

दुनिया के सर्वश्रेष्ठ आठ खिलाड़ियों के बीच यह मैच टूर्नामेंट खेला गया था, जो 14 बाजियों तक चला था। आनंद ने अपनी बादशाहत साबित करके बड़े दमदार अंदाज में इसमें जीत दर्ज की थी। इससे उन्हें मैच प्रारूप की अगली विश्व चैंपियनशिप में तब उन्हीं की तरह अजेय माने जा रहे रूस के व्लादीमीर क्रैमनिक से भिड़ने का हक भी मिला।

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विश्व चैंपियन 2008

विश्व चैंपियनशिप फिर से मैच प्रारूप में खेली जाने लगी जैसा कि शतरंज में बहुत पहले से होता रहा है। आनंद को क्रैमनिक के सामने पहले खिताब का प्रबल दावेदार नहीं माना जा रहा था, लेकिन पूरी दुनिया ने भारतीय खिलाड़ी में बड़ा बदलाव देखा था। यह 12 बाजियों का मुकाबला था जो 11 बाजियों में समाप्त हो गया। आनंद ने तीन बाजियां जीती, एक गंवाई और बाकी सात ड्रॉ कराकर 6.5 अंक हासिल करके खिताब अपने नाम किया। आनंद इस तरह से नाकआउट, मैच टूर्नामेंट और मैच तीनों प्रारूप में खिताब जीतने वाले पहले दुनिया के पहले खिलाड़ी बने।

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विश्व चैंपियन 2010 [सोफिया, बुल्गारिया]

आइसलैंड में ज्वालामुखी फूटने के कारण पूरे यूरोप में व्यवधान पैदा हुआ। आनंद भी 40 घंटे का सफर सड़क मार्ग से तय करके सोफिया पहुंचे थे। उन्होंने प्रतियोगिता तीन दिन बाद आयोजित कराने के लिए कहा था, लेकिन उन्हें केवल एक दिन दिया गया। उन्हें तमाम विपरीत परिस्थितियों में वेसलिन टोपालोव के खिलाफ उनके देश में खेलना था। आनंद पहले दौर में हार गए, लेकिन उन्होंने आखिरी बाजी काले मोहरों से जीतकर खिताब अपने नाम किया।

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