संसू, महिषी (सहरसा): गत दो अगस्त को बलुआहा पुल के पश्चिम कोसी नदी से लकड़ी निकाल रहे एक बच्चे को डूबता देखकर उसे बचाने के लिए नदी में उतरे कोठिया के शिवनंदन चौधरी की मौत कोसी नदी में डूबने से मौत हो गई थी।

14 दिनों के बाद शव सोमवार को घटनास्थल से करीब तीन किमी दूर कारू खिरहरि मंदिर के सीधे नदी के पश्चिमी किनारे पर झाड़ियों के पास मिला। शव मिलने की सूचना पुलिस को दी गई, किंतु विलंब से पुलिस के पहुंचने और शव की फोरेंसिक जांच के लिए भागलपुर भेजने का खर्च स्वजनों के द्वारा वहन किए जाने की बात पर लोग आक्रोशित हो गये। इसके बाद शव के साथ लोगों ने बलुआहा पुल को जाम कर दिया।

ग्रामीणों के अनुसार, शव मिलने की सूचना पुलिस को फोन पर दी गई। परंतु पुलिस काफी विलंब से घटना स्थल पर पहुंची तथा शव की स्थिति को देख उसे फोरेंसिक जांच के लिए भागलपुर भेजने की संभावना व्यक्त की। तत्पश्चात शव को भागलपुर भेजने का खर्च भी स्वजनों को वहन करना होगा जिसके बाद जाम कर दिया गया। घटनास्थल पर पहुंचे एसआई महेश कुमार और एएसआई मु. मुमताज ने ग्रामीणों को समझा-बुझाकर करीब एक घंटे बाद जाम समाप्त कराया। कागजी खानापूर्ति के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए सहरसा भेज दिया गया।

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पुलिस को नहीं मिलता है खर्च

जानकारी के अनुसार, पुलिस को शव के पोस्टमार्टम या फोरेंसिक जांच में भेजने के लिए किसी प्रकार की राशि किसी मद उपलब्ध नहीं कराया जाता है जिसके कारण जांच प्रक्रिया में आने वाला सारा खर्च केस के अनुसंधानकर्ता को करना पड़ता है। शव को फोरेंसिक जांच के लिए भागलपुर भेजने में करीब 10 हजार तक खर्च आ जाता है जिसके कारण पुलिस जल्द उसे नहीं भेजती है। थानाध्यक्ष शिवशंकर कुमार ने बताया कि शव मिलने की सूचना उन्हें फोन पर मिली थी। स्वतंत्रता दिवस के कारण पुलिस को पहुंचने में थोड़ा विलंब हुआ। शव फोरेंसिक के लिए स्वजनों पर खर्च देने की बात की जानकारी नहीं है।

Edited By: Jagran