जासं, कैथल : अमर बलिदानी मदन लाल ढींगड़ा के स्मारक पर माल्यार्पण कर पंजाबी वेलफेयर सभा के सदस्यों ने मोमबत्ती व दीये जलाए। प्रधान राजकुमार मुखीजा ने बलिदानी मदनलाल के जीवन के बारे में बताते हुए कहा कि आज हमें आजाद भारत के नागरिक होने पर जो सुखद अनुभूति हो रही है, वह बलिदानियों और क्रांतिकारियों के बलिदान की वजह से ही संभव हुई है। ढींगड़ा देश के प्रख्यात राष्ट्रवादी दामोदर सावरकर के संपर्क में आ गए थे। उनकी प्रचंड देशभक्ति की भावना से सावरकर काफी प्रभावित हुए। देश के विद्यार्थियों में राजनीतिक चेतना उत्पन्न करने व ब्रिटिश सत्ता को उखाड़ फेंकने के लिए मदनलाल ने दिन-रात एक कर दिया था। खुदीराम बोस व अन्य क्रांतिकारियों को मृत्यु दंड दिए जाने पर ढींगड़ा का खून खोल उठा था और उसका बदला मदनलाल ने अंग्रेज अधिकारी को मौत के घाट उतार कर लिया था। उसी मामले में ढींगड़ा को 21 जुलाई 1909 को अदालत ने मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। 17 अगस्त 1909 को उन्हें फांसी दे दी गई। सभा के पूर्व प्रधान व मुख्य संरक्षक इंद्रजीत सरदाना ने कहा कि आज हमें बलिदानियों के सपनों पर चलते हुए देशहित में कार्य करने की जरूरत है।

महासचिव सुषम कपूर ने कहा कि मदन लाल ढींगड़ा के बलिदान दिवस पर हम इतना तो कर ही सकते हैं कि राष्ट्र के प्रति अपने दायित्व को समझें। इस अवसर पर राकेश मल्होत्रा, राज कुमार दुआ, सतीश सोनी, अशोक भारती, धन सचदेवा, नरेंद्र निझावन, सीता राम गुलाटी, वीके चावला, अश्वनी खुराना, प्रदर्शन परुथी, गुलशन चुघ, जगदीश कटारिया, योगराज बत्रा, तुलसी मदान, मनमोहन सुखीजा, प्रवीण थरेजा मौजूद रहे।

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