जागरण संवाददाता, गोहाना : भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय में हुए घोटाले में सदर थाना गोहाना की पुलिस गहनता से जांच कर रही है। साफ्टवेयर से डिलीट किए गए रिकार्ड और लोगों को दी गई रसीदों का मिलान किया जा रहा है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में विश्वविद्यालय में लगभग 45 लाख का घोटाला होने की आशंका है, जबकि मुख्यमंत्री उड़नदस्ता रोहतक की टीम ने करीब डेढ़ करोड़ रुपये के घोटाले की आशंका जताई थी। उधर, पुलिस ने शनिवार को आरोपित पूर्व लिपिक को दोबारा अदालत में पेश करके चार दिन के रिमांड पर लिया है।

महिला विश्वविद्यालय की लेखा शाखा में करीब पांच-छह साल घोटाला हुआ था। 2015-16 में विश्वविद्यालय में मार्केट का किराया, बिजली बिल, विद्यार्थियों के फार्म की फीस, पेपर, डीएमसी फीस, विद्यार्थियों पर लगने वाला जुर्माना और लेट फीस के रूप मिलने वाली नकदी की रसीद हाथ से काटी जाती थी। उस समय लेखा शाखा में सीमा मलिक की बतौर लिपिक नियुक्त थी। 2017 में विश्वविद्यालय में साफ्टवेयर से आनलाइन फीस जमा करवानी शुरू की गई। सीमा लोगों को रसीद दे देती थी और साफ्टवेयर से रिकार्ड को डिलीट कर दिया जाता था। इस तरह से घोटाले को अंजाम दिया जाता रहा। विश्वविद्यालय के अधिकारियों के संज्ञान में मामला आने पर जांच करवाई गई और सीमा से लगभग 26 लाख रुपये की रिकवरी की गई। बाद में इस मामले की जांच मुख्यमंत्री उड़नदस्ता रोहतक ने की। उप निरीक्षक कर्मबीर की जांच में तत्कालीन रजिस्ट्रार ऋतु बजाज, लेखा अधिकारी राजेश मनोचा, लिपिक सीमा मलिक, पूर्व लेखा अधिकारी राजेश वर्मा, अकाउंट आफिसर वेदप्रकाश दुआ और डाटा एंट्री आपरेटर अजय मलिक संदिग्ध भूमिका में पाए गए थे। उप निरीक्षक की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया था और उन्होंने करीब डेढ़ करोड़ रुपये का घोटाला होने की आशंका जताई थी। इस मामले में अब सदर थाना गोहाना के प्रभारी कर्मजीत जांच कर रहे हैं। उन्होंने पुलिस टीम के साथ लिपिक सीमा मलिक को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने शनिवार को उसे दोबारा अदालत में पेश करके चार दिन के रिमांड पर लिया है। पुलिस जांच कर रही है कि सीमा मलिक किस तरह से रिकार्ड को डिलीट करती थी और दूसरे अधिकारियों की क्या भूमिका थी। कर्मजीत सिंह ने कहा कि प्रारंभिक जांच में करीब 45 लाख रुपये के घोटाले की बात सामने आ रही है। विश्वविद्यालय ने भी इस संबंध में स्पेशल आडिट करवाया था।

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