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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 12, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

RIMS: जब तक थे पैसे किया इलाज, खत्म होते ही डाक्टरों ने मूक-बधिर बच्ची व मां को निकाला बाहर

By Jagran NewsEdited By: Sanjay Kumar
Published: Sat, 12 Nov 2022 01:02 PM (IST)Updated: Sat, 12 Nov 2022 01:04 PM (IST)

Ranchi RIMS News रांची के रिम्स अस्पताल में धनबाद से एक परिवार अपनी मूक-बधिर बच्ची का इलाज कराने आया। जब ...और पढ़ें

Ranchi RIMS News: पैसे नहीं रहने पर डाक्टरों ने मूक-बधिर बच्ची व मां को निकाला बाहर।
Ranchi RIMS News: पैसे नहीं रहने पर डाक्टरों ने मूक-बधिर बच्ची व मां को निकाला बाहर।

रांची, जासं। Ranchi RIMS News रिम्स में डाक्टरों द्वारा मरीज का इलाज नहीं करने का मामला सामने आया है। शिशु रोग विभाग में भर्ती एक मूक-बधिर बच्ची (12 वर्ष) बच्चे की मां ने डाक्टरों पर आरोप लगाया है कि जब उसके पास पैसा खत्म हो गया तो कहा गया कि वे अपने बच्ची को वापस ले जाए। बच्ची की मां ने बताया कि बच्ची को डा एके वर्मा की यूनिट में भर्ती कराया गया था, जहां बच्चे को तेज बुखार था। उसे धनबाद पीएमसीएच से गुरुवार को रिम्स रेफर किया गया था।

परिजनों का क्या है कहना

परिजनों ने बताया कि यहां जब से बच्ची को भर्ती कराया गया है तब से उसे बाहर से ही दवा खरीदनी पड़ रही है। डाक्टरों ने हमेशा बाहर से ही दवा लाने को कहा था, जब दवा खरीदने के पैसे खत्म हो गए तो उससे कहा गया कि अब इलाज नहीं हो सकता, बिना दवा के बचाना मुश्किल है, रिम्स में कोई दवा नहीं है। जिसके बाद मायुस होकर मां अपने बच्ची के साथ रिम्स परिसर में स्थित पेड़ के नीचे बैठ गई और ऊपर वाले से दुआ करने लगी कि शायद कोई उसकी बेटी का इलाज कर दें।

12 घंटे में पांच इंजेक्शन दी गई बच्ची को, सभी बाहर से खरीदी गई

रिम्स प्रबंधन चाहे कितने ही दावे कर ले, लेकिन सच्चाई कुछ अलग ही है। यहां मरीजों को दवा नहीं मिलती इस बात से कोई इंकार नहीं कर सकता। जो दवा मिलती है उसे खुद डाक्टर भी नहीं लिखते। यही स्थिति इस गरीब परिवार के साथ हुआ और यहां भर्ती हर एक मरीज की ऐसी ही स्थिति है। धनबाद जिले की इस बेटी का सरकारी अस्पताल में इलाज कराते कराते परिवार थक गया। डाक्टर तब तक बच्ची की मां से बाहर की दवाएं मंगवाते रहें जब तक उसके सारे पैसे खत्म नहीं हो गए। 12 घंटे में बच्ची को सात तरह की दवा दी गई, जिसमें पांच तरह का इंजेक्शन लिखा गया था।