रांची, राज्य ब्यूरो। Ranchi Communal Violence रांची के मेन रोड में 10 जून को जुमे की नमाज के बाद उपद्रव, पत्थरबाजी व गोलीबारी मामले में चल रही सीआइडी जांच व राज्य सरकार की दो सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच की रफ्तार धीमी है। अब तक रांची पुलिस व सीआइडी ने इस पूरे प्रकरण में 30 से अधिक उपद्रव करने के आरोपितों तो जेल तक तो भेज दी है, लेकिन अगर 90 दिनों के भीतर उनपर चार्जशीट नहीं की तो सभी जेल से बाहर आ जाएंगे। जेल भेजे गए आरोपितों के 90 दिन पूरे होने में अभी करीब 20 दिन शेष है, लेकिन जिस रफ्तार से जांच चल रही है, उसमें यह संभावना बन रही है कि शायद 90 दिनों में सीआइडी चार्जशीट न कर पाए। इसपर सीआइडी के अधिकारियों का कहना है कि पर्याप्त साक्ष्य जुटाने में वक्त लग रहा है, जिसके चलते थोड़ा समय लग रहा है। ठोस साक्ष्य के साथ ही सीआइडी चार्जशीट करेगी, जांच जारी है। इधर, राज्य सरकार के निर्देश पर गठित दो सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच भी अभी जारी है। अब तक इस समिति ने 200 से अधिक प्रत्यक्षदर्शियों, पीड़ितों का बयान ली है। पीड़ितों में पुलिस के अधिकारी-कर्मी से लेकर दूसरी ओर से विरोध मार्च निकालने वाले व हिंसक झड़प में उपद्रवियों की ओर से शामिल लोग भी हैं।

उपद्रव व गोलीबारी में गई थी दो की जान

रांची के मेन रोड में उपद्रव व गोलीबारी तथा पत्थरबाजी में विरोध मार्च निकालने वाले जुलूस में शामिल दो युवकों की जान चली गई थी। इस घटना में दोनों तरफ से दो दर्जन से अधिक पुलिस व आम लोग जख्मी हुए थे, जिनका रिम्स में इलाज कराया गया था। इस पूरे प्रकरण में रांची के डेलीमार्केट थाने में मुख्य प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी, जिसे सरकार के निर्देश पर जांच के लिए सीआइडी को सौंप दिया गया है। सीआइडी के डीएसपी महेंद्र सिंह मुंडा कांड के अनुसंधानकर्ता बनाए गए हैं। जांच जारी है। सीआइडी ने केस को टेकओवर लेने के बाद तीन अन्य आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। इस प्रकरण से संबंधित अभी 47 केस का अनुसंधान रांची पुलिस के पास है।

आरोपितों को गिरफ्तार नहीं कर सकी पुलिस

रांची में उपद्रव की आग भड़काने में यूपी व बिहार कनेक्शन सामने आया था। पुलिस के अनुसंधान में इस बात की पुष्टि हुई कि उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से आए तीन लोगों के अलावा बिहार के पटना से आए तीन लोगों ने भी भीड़ को उपद्रव के लिए उकसाया। खूंटी के उपद्रवियों की भी पुलिस को जानकारी मिली थी। अब तक यूपी-बिहार के साजिशकर्ता नहीं पकड़े जा सके हैं, वहीं खूंटी के उपद्रवियों की गिरफ्तारी के लिए भी कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है। पुलिस अनुसंधान में इस बात की भी पुष्टि हो चुकी है कि मेन रोड पर 10 जून को जुमे की नमाज के बाद बवाल सुनियोजित था। घटना के कुछ दिन पहले से इसकी तैयारी चल रही थी। उपद्रव के मार्ग में कई छतों पर सुनियोजित तरीके से ईंट-पत्थर जुटाकर रखे गए थे। बवाल, पत्थरबाजी व फायरिंग के वक्त उपद्रवी बोरे में भरकर पत्थर ले गए थे, जिसकी पुष्टि हो चुकी है।

Edited By: M Ekhlaque