जागरण संवाददाता, कपूरथला : दुखियों, लाचार, बीमार एवं नशे के जाल में फंसे लोगों को निजात दिलाने के लिए दा ओपन डोर चर्च खोजेवाल में चीफ पास्टर डा. हरप्रीत दियोल 18 अगस्त से प्रभू यीशु मसीह के समक्ष विशेष प्रार्थना करेगे। इसके बाद 21 अगस्त को भी प्रार्थना का आयोजन होगा। वीरवार को होने वाली प्राथना सभा सुबह 10 बजे आरंभ होगी।

चीफ पास्टर डा. हरप्रीत दियोल का कहना है कि सच्ची प्रार्थना परमेश्वर को यह बताना है कि तुम्हारे हृदय में क्या है। परमेश्वर की इच्छा को समझकर उससे बात करना है। परमेश्वर के वचनों के माध्यम से उसके साथ संवाद करना है। स्वयं को विशेष रूप से परमेश्वर के निकट महसूस करना है। यह महसूस करना है कि वह तुम्हारे सामने है और यह विश्वास करना है कि तुम्हें उससे कुछ कहना है। तुम्हें लगेगा कि तुम्हारा हृदय प्रकाश से भर गया है और तुम्हें महसूस होगा कि परमेश्वर कितना प्यारा है।

डा. दियोल ने कहा कि एक बार जब तुम सच्चे मन से प्रार्थना करने लगेंगे तो मन शांत हो जाएगा और संतुष्टि का एहसास होगा। परमेश्वर से प्रेम करने की शक्ति बढ़ सकती है और तुम महसूस करोगे कि जीवन में परमेश्वर से प्रेम करने से अधिक मूल्यवान या अर्थपूर्ण और कुछ नहीं है। इससे साबित होता है कि तुम्हारी प्रार्थना प्रभावी रही है। उन्होंने फरमाया जब कठिनाइयां हमारे सामने आती हैं, तो केवल परमेश्वर ही हमारा सहारा होते हैं।

प्रार्थना कुछ वचनों को रटना नहीं है और यह दूसरों की नकल करना नहीं है। प्रार्थना में व्यक्ति को उस स्थिति तक पहुंचना चाहिए जहां अपना हृदय परमेश्वर को दिया जा सके। केवल परमेश्वर के वचनों के भीतर से प्रार्थना करने से ही व्यक्ति अधिक प्रबुद्धता और रोशनी प्राप्त कर सकता है।

प्रार्थना के बाद यदि संकल्प, विश्वास, ज्ञान और अभ्यास का मार्ग हो, केवल तभी उसे सच्ची प्रार्थना कहा जा सकता है। उसके वचनों में, संवाद करने की नींव पर स्थापित होना चाहिए और हृदय को परमेश्वर की खोज करने और उसके समक्ष शांत होने में सक्षम होना चाहिए।

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