बोरे में पैसे 

समाचार माध्यमों से मिली खबरों के मुताबिक एक पति ने अपनी पत्नी को तलाक का फैसला होने पर गुजारा भत्ता तो दिया लेकिन फिर भी वो खुश होने के स्थान पर गुस्से में आ गर्इ आैश्र पति पर प्रताड़ना का आरोप लगाने लगी। दरसल तलाक के एक मामले में चंड़ीगढ़ की एक अदालत ने एक व्‍यक्ति को अपनी पूर्व पत्‍नी को गुजारा भत्‍ते के रूप में 25 हजार रूपये देने को कहा। व्यक्ति ने दे भी दिये पर इस रकम में 100 के सिर्फ 4 नोट थे शेष 24600 रुपये की पूरी राशि 1 और 2 रुपये के सिक्के के रूप में थी। हालत ये हुर्इ कि इन पैसों को गिनने में पूरा दिन निकल गया। यहां तक कि अदालत की कार्रवाई तक स्‍थगित करनी पड़ी। 

पेशे से वकील है व्यक्ति 

बताया जा रहा है कि महिला का पूर्व पति जिसने मुआवजे की ये राशि दी है, वो पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में वकील है। बोरे में इतने सारे सिक्‍के देखकर वकील की तलाकशुदा पत्नी ने नाराजगी जताई है और कहा है कि ये उन्हें प्रताड़ित और परेशान करने का एक नया तरीका। इन्होंने 2015 में तलाक के लिए आवेदन दिया था। तलाक का मामला तय होने पर अदालत ने वकील पति से कहा कि वो हर महीने अपनी पत्नी को 25 हजार रुपये गुजारा भत्‍ता के रूप में दे। आदेश के बाद भी जब पति ने गुजारा भत्‍ता नहीं दिया तो पत्नी ने दोबारा अदालत में गुहार लगार्इ। जिस पर पति को आदेश दिया गया कि वो दो महीने का खर्च जो 50 हजार रुपये होता है पत्नी को भुगतान करे। 

दवाब के जवाब में सामने आया ये नतीजा

इस आदेश पर पति की आेर से दलील दी गर्इ कि उसके पास एक मुश्त इतनी रकम नहीं है। इस बात को पत्नी ने नकार दिया आैर कहा कि उनके पति एक कामयाब वकील जिनके कई संपन्न लोग क्‍लाइंट हैं। साथ ही उनके नाम पर कई संपत्ति भी हैं। ऐसे में ये नहीं माना जा सकताकि उनके पास एलिमनी की रकम नहीं हैं। जिस पर अदालत ने वकील को तत्काल खर्चा देने का आदेश जारी कर दिया। जिस के जवाब में वकील महोदय ने ये कारनामा किया आैर अदालत में पहले महीने की रकम जमा कराते हुए चार सौ के नोट आैर शेष 24600 रुपये सिक्कों में जमा करा दिए। 

झुंझलार्इ पत्नी 

इन पैसों को देख कर महिला स्तब्ध रह गर्इ आैर परेशान भी हो गर्इ। उसका कहना है  कि उन्हें पैसों की तत्काल आवश्यकता है आैर पति हैं कि उन्हें परेशान करने के तरीके ढूंढ रहे हैं। एक तो उन्‍होंने कई सुनवाई के बाद पैसा दिया आैर वो भी इस तरीके। अब महिला की सबसे बड़ी समस्याहै कि वे इस पैसे को कैसे इस्तेमाल करेंगी, उनका कहना ये तो कोर्इ बैंक भी नहीं एक्सेप्ट करेगा।  वहीं पति का दावा है कि उसने कुछ भी गलत नहीं किया है। आदेश में कहीं नहीं कहा गया था कि पैसा 100, 500 या 2000 रुपये के नोट में देना होगा। उसने अपने तीन जूनियर की मदद से इस पैसे को गिना आैर जमा करवा दिया। इस मामले की आगामी सुनवार्इ अदालत अब 27 जुलाई को होगी। 

Posted By: Molly Seth