पहले भूखंड आवंटन, फिर चमकेगा जिगनीखास औद्योगिक क्षेत्र

जागरण संवाददाता, बलिया : जिले में कोई बड़ा उद्योग नहीं है, जिससे बेरोजगारों को यहीं काम मिल सके। प्रदेश सरकार इस दिशा में तेजी काम कर रही है। लघु उद्योग के पांव मजबूत करने के मकसद से राजधानी मार्ग पर जिगनीखास गांव में नया राजकीय मिनी औद्योगिक क्षेत्र स्थापित करने की कवायद चल रही है। यहां 36 प्लाट तय कर दिए गए हैं, लेकिन अभी उद्यमियों के लिए कोई सुविधा नहीं है। करीब छह महीने पहले जिला उद्योग प्रोत्साहन और उद्यमिता विकास केंद्र ने करीब 3.66 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा था। अब उत्तर प्रदेश लघु उद्योग निगम कानपुर ने प्रोजेक्ट पर ऐतराज जता दिया है। निदेशक ने प्रस्ताव को लौटा दिया है। उन्होंने उपायुक्त उद्योग को आदेश दिया है कि पहले सारे प्लाट आवंटित किए जाएं, इसके बाद विकास के लिए धन जारी किया जाएगा। अब विभाग ने आवेदन मांगने शुरू किए हैं, इसके लिए आठ उद्यमियों ने लघु इकाई स्थापित करने की इच्छा जताई है। मिनी औद्योगिक क्षेत्र में सड़क, नाली, पुलिया व प्रशासनिक भवन का निर्माण किया जाना है। प्लाट आवंटन के बाद नए सिरे से कार्ययोजना तैयार होगी।

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डीएम की सहमति, भेजा गया बनरही का प्रस्ताव

बनरही मिनी औद्योगिक क्षेत्र में 41 प्लाट हैं। सभी आवंटित हो चुके हैं। करीब पांच साल से यहां प्लास्टिक, आटा चक्की, पाइप और एलईडी उपकरण समेत कई छोटे कारखाने चल रहे हैं। यहां समस्याएं बहुत हैं। नाली, सड़क और बाउंड्रीवाल नहीं होने के कारण उद्यमी परेशान रहते हैं। आए दिन मुद्दा गरम होता है। इस कारण करीब एक करोड़ का प्रस्ताव भेजा गया था, इसे शासन ने लौटा दिया। कारण कि डीएम के हस्ताक्षर नहीं थे। अब डीएम ने सहमति दी है, दोबारा प्रस्ताव को भेजा गया है।

जिगनीखास के लिए आवेदन आने शुरू हो गए हैं। उन पर मंथन के बाद जल्द फाइनल कर दिया जाएगा। औद्योगिक विकास के लिए बजट आवंटन होना जरूरी है।

अशोक कुमार, अपर सांख्यिकी अधिकारी, जिला उद्योग प्रोत्साहन और उद्यमिता विकास केंद्र

Edited By: Jagran