नई दिल्ली [संजीव गुप्ता]। दिल्ली एनसीआर सहित देशभर में एक चौथाई वायु प्रदूषण (Air Pollution) दोपहिया वाहन से होता है। सड़कों पर सबसे ज्यादा संख्या भी इन्हीं की होती है और ज्यादातर चलते भी पेट्रोल से ही हैं।

इंटरनेशनल काउंसिल फार क्लीन ट्रांसपोर्टेशन (ICCT) के एक अध्ययन के मुताबिक 2021 में पेट्रोल की कुल खपत का 70 प्रतिशत सड़क परिवहन जबकि 25 प्रतिशत दोपहिया वाहनों (Two Wheelers) में उपयोग हुआ। अध्ययन में कहा गया है कि अगर हम पेट्रोल से चलने वाले दोपहिया वाहनों को ही बढ़ाते रहे तो सन 2050 तक भारत में जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता दोगुने से भी ज्यादा हो जाएगी।

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अगले कुछ सालों में 100 प्रतिशत हो जाएंगे दो पहिया वाहन

वैसे पिछले कुछ सालों से देश में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की मांग बढ़ने से ई-मोबिलिटी की तरफ कदम बढ़ाने के देश के प्रयासों को गति मिली है। नीति आयोग और टेक्नोलॉजी इन्फार्मेशन, फोरकास्टिंग एंड असेसमेंट काउंसिल (टीआइएफएसी) की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 तक भारत में 100 प्रतिशत दोपहिया इलेक्ट्रिक हो जाने की संभावना है।

इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर तेजी से बढ़ रहे

द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (टेरी) के सीनियर विजिटिंग फेलो आइवी राव कहते हैं, ‘भारत में दोपहिया को हमेशा से वाहनों की श्रेणी में अहम माना गया है, जहां अन्य किसी भी सेगमेंट की तुलना में ईवी (Electric Vehicle) की ओर ज्यादा तेजी से बढ़ सकते हैं। इसके कई कारण हैं, जैसे इसके लिए सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।

फेम 2 स्कीम और राज्यों के इंसेंटिव के कारण तुलनात्मक रूप से इनकी कीमत कम होती है। उपभोक्ताओं की खरीद क्षमता बढ़ रही है और इसके परिचालन की लागत भी बहुत कम है। दोपहिया के मामले में तेजी से ईवी की ओर कदम बढ़ने से पेट्रोल की मांग पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा, जिससे निश्चित तौर पर आयात पर निर्भरता एवं उत्सर्जन कम होगा।

पेट्रोल की मांग में आएगी रिकॉर्ड कमी

आइसीसीटी की शोधार्थी (कंसल्टेंट) शिखा रोकड़िया ने कहा, ‘2035 तक नए बिकने वाले 100 प्रतिशत दोपहिया वाहनों को इलेक्ट्रिक कर लिया जाए तो भारत में 2020 से 2050 के बीच पेट्रोल की मांग में 500 मिलियन टन से ज्यादा और इससे संबंधित लागत में 740 अरब डालर से ज्यादा की कमी आ सकती है। प्रदूषण के लिहाज से देखें तो भारत ने पिछले दशक में बीएस-6 उत्सर्जन मानक अपनाने समेत नीतिगत मोर्चे पर कुछ अहम कदम उठाए हैं। इससे वायु प्रदूषण में होने वाली वृद्धि को काफी हद तक कम किया जा सका है।‘

विशेषज्ञों के अनुसार देश आजादी की 75वीं वर्षगांठ मना रहा है। ऐसे में आने वाले वर्षों में परिवहन क्षेत्र के कारण होने वाले कार्बन उत्सर्जन को खत्म करने और नेट जीरो के लक्ष्य को पाने की दिशा में बड़े पैमाने पर वाहनों को इलेक्ट्रिक करना अहम होगा। ई-मोबिलिटी को अपनाने से तेल आयात कम करने, वायु गुणवत्ता सुधारने, जलवायु परिवर्तन पर लगाम के कदमों को सहयोग देने जैसे अनेक अन्य राष्ट्रीय लक्ष्य प्राप्त करने में भी सहायता मिलेगी। इससे तेजी से बदलते वैश्विक बाजार में भारत की औद्योगिक प्रतिस्पर्धी क्षमता भी बढ़ेगी।

Edited By: Geetarjun