नई दिल्ली [वी के शुक्ला]। आइपी एस्टेट स्थित दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) मुख्यालय की 12 मंजिला इमारत को बनाने के लिए दिल्ली सरकार गंभीर हो गई है। सरकार ने इस इमारत के निर्माण से संबंधित प्रक्रियाएं पूरी करने के लिए कहा है। सरकार ने दिल्ली स्टेट इंडस्टि्रयल एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड (डीएसआइआइडीसी) से परियोजना के आ रहीं बाधाओं को दूर कर लेने के लिए कहा है।

सरकार की योजना है कि इमारत के निर्माण से संबंधित सभी अड़चनें दूर कर ली जाएं और संबंधित विभागों की स्वीकृति ले ली जाए। इसके बाद ही इस परियोजना को आगे बढ़ाने की दिशा में काम किया जाए। सरकार की योजना के अनुसार डीटीसी मुख्यालय अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित 12 मंजिला इमारत में होगा। अभी मुख्यालय 64 साल पुरानी इमारत में चल रहा है।

दिल्ली सरकार इसके लिए नई इमारत बनाने की अनुमति दे चुकी है। योजना के अनुसार इसे दिल्ली स्टेट इंडस्टि्रयल एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड (डीएसआइआइडीसी) बनाएगा। डीएसआइआइडीसी भी इस निर्माण में अपना पैसा लगाएगा और इसकी एवज में यह निगम इस मुख्यालय में अपने कार्यालयों के लिए भी जगह लेगा।

यहां पर दिल्ली सरकार के अन्य कार्यालय भी स्थानांतरित किए जा सकेंगे। मुख्यालय की नई इमारत के साथ साथ डिपो को भी अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जाएगा। जल्द ही इसके लिए टेंडर जारी किए जाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

आइपी डिपो और मुख्यालय की इमारत का निर्माण 1958 में हुआ था। इसमें 180 बसें खड़ी करने की व्यवस्था है।इमारत पुरानी होने के कारण कई जगह से क्षतिग्रस्त भी हो गई है। इसलिए डिपो व मुख्यालय की नई इमारत बनाने की योजना है। पुनर्निर्माण कार्य शुरू करने के लिए डीटीसी मुख्यालय को इसके सामने प्रगति पावर थर्मल पावर स्टेशन परिसर की इमारत में अस्थायी तौर पर स्थानांतरित करने का प्रस्ताव है।

योजना के अनुसार मुख्यालय इमारत तीन वर्ष में बनकर तैयार हो जाएगी। सुरक्षा व जरूरी उपकरणों से सुसज्जित यह इमारत 24,410 वर्ग मीटर में बनेगी। इमारत में तीन बेसमेंट होंगे। इमारत में अग्निरोधक सयंत्र, लिफ्ट, पावर बैकअप के लिए व्यवस्था होगी। सुरक्षा के लिहाज से सीसीटीवी कैमरे लगे होंगे। इसके निर्माण में पर्यावरण का भी ध्यान रखा जाएगा।

इसमें जल व ऊर्जा संरक्षण और दूषित जल शोधन की विशेष व्यवस्था होगी। सीवर व गंदे पानी के शोधन के लिए अत्याधुनिक जल शोधन प्लांट लगेगा। इसमें सौर ऊर्जा की भी व्यवस्था की जाएगी। इसके अतिरिक्त जल और ऊर्जा संरक्षण के लिए भी ऐसे उपकरण लगाए जाएंगे, जिनसे लगभग 35 प्रतिशत ऊर्जा संरक्षित होगी।इस इमारत के साथ ही आइपी डिपो भी बेहतर किया जाएगा।

Edited By: Prateek Kumar