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'आपका भरोसा सबसे जरूरी', कपिल सिब्बल की 'नो फेथ' टिप्पणी पर सुप्रीम कोर्ट का जवाब

Published: Sun, 11 Oct 2026 06:33 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में प्रदर्शनों के दौरान सख्ती और हिरासत में लिए गए लोगों पर सुनवाई करते हुए न्यायिक प्रणाली में जनता का भरोसा जगाने पर जोर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने कपिल सिब्बल की टिप्पणी का दिया जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने कपिल सिब्बल की टिप्पणी का दिया जवाब

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को प्रदर्शन के दौरान सख्ती और हिरासत में लिए गए लोगों को लेकर एक विशेष सुनवाई के दौरान जोर देकर कहा कि उसका मुख्य मकसद न्यायिक प्रणाली में आम जनता का भरोसा जगाना है।

अदालत ने वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल की भरोसा न होने वाली टिप्पणी का जिक्र करते हुए कहा कि अन्याय के खिलाफ न्यायपालिका की लड़ाई में कानूनी बिरादरी और नागरिकों का भरोसा बेहद महत्वपूर्ण है।

'लोगों का सिस्टम में भरोसा जगाना मकसद'

सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा, हमारा मकसद लोगों का सिस्टम में भरोसा जगाना है और इस पूरी प्रक्रिया में अन्याय के खिलाफ हमारी लड़ाई के लिए आपका (सिब्बल का) विश्वास बहुत जरूरी है।

सुप्रीम कोर्ट ने दिए कड़े निर्देश

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि वे राजधानी दिल्ली में सीजेपी और अन्य संगठनों के विरोध प्रदर्शनों के दौरान शांतिपूर्ण सभाओं में शामिल होने वाले लोगों को गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लेने से रोकें।

अदालत ने केंद्र सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया कि वह कानून-व्यवस्था की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यह सुनिश्चित करे कि दिल्ली मेट्रो सेवाएं सामान्य रूप से चलें और इंटरनेट सेवाएं बिना किसी रुकावट के जारी रहें।

सिब्बल ने आदेश का किया स्वागत

सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने विरोध प्रदर्शनों के बीच दिल्ली में लगाई गई पाबंदियों के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत के इस हस्तक्षेप से देश का न्याय व्यवस्था में पेशेवरों और आम जनता का विश्वास फिर से बहाल होता है।

प्रदर्शनकारी और नेता लिए गए थे हिरासत में

बता दें कि चुनाव आयोग के कामकाज में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सीजेपी और अन्य संगठनों ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन का आव्हान किया था। प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए जंतर-मंतर पर भीड़ इकट्ठा करने से रोक दिया था।

पुलिस ने हजारों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था, जिनमें सीजेपी नेता अभिजीत दीपके, कई विपक्षी नेता और यूट्यूबर ध्रुव राठी शामिल थे।

'सुविधाएं नहीं होनी चाहिए प्रभावित'

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने राजधानी में मेट्रो और इंटरनेट सेवाओं पर पूरी तरह रोक लगाने से जुड़े एक मामले पर सुनवाई करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए नागरिकों की बुनियादी सुविधाएं प्रभावित नहीं होनी चाहिए। अदालत ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि वकीलों, पत्रकारों और अन्य पेशेवरों को उनके कर्तव्यों का पालन करने से न रोका जाए।

पीठ ने स्पष्ट किया, कानून द्वारा तय प्रक्रिया के बिना किसी भी व्यक्ति को गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में नहीं लिया जाएगा, खासकर उन लोगों को जो प्रतिबंधित क्षेत्र के बाहर शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा होते हैं।

इसके साथ ही, शीर्ष अदालत ने अधिकारियों को अपने परिसर के बाहर लगाए गए उस नोटिस बोर्ड को तुरंत हटाने का निर्देश दिया, जिसमें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू करने की घोषणा की गई थी। अदालत ने कहा कि इस बोर्ड को हटाया जाए ताकि आम नागरिकों और वकीलों को न्याय तक पहुंचने में कोई बाधा न आए।