'पूछना ठीक नहीं', साहिल की मौत से कई साल पहले प्रो. डूला ने IIT बॉम्बे के छात्रों को जातिगत भेदभाव के खिलाफ दी थी चेतावनी
आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या के बाद जातिगत भेदभाव के आरोप लगे हैं। इस घटना के बाद प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला का एक पुराना ईमेल चर्चा में है।

कई साल पहले प्रोफेसर डूला ने दी थी छात्रों को चेतावनी।
डिजिटल डेस्क, मुंबई। पिछले हफ्ते आत्महत्या करने वाले छात्र साहिल वाकोडे के परिवार ने जातिगत भेदभाव के आरोप लगाए हैं। इन आरोपों के बीच आईआईटी बॉम्बे के प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला का 2024 का एक ईमेल चर्चा में आ गया है। उस समय वे संस्थान के डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स थे।
ईमेल में प्रोफेसर डूला ने छात्रों को सलाह दी थी कि वे अपने साथी छात्रों से उनकी एडमिशन कैटेगरी, जी (एडवांस्ड) रैंक या गेट स्कोर के बारे में न पूछें। उन्होंने कहा कि ऐसे सवालों से उनकी जाति या रिजर्व्ड कैटेगरी से उनके संबंध का पता चल सकता है।
'ऐसा पूछना गलत है'
ईमेल में कहा गया था कि आईआईटी बॉम्बे एक ऐसा कैंपस बनाना चाहता है जहां सभी को शामिल किया जाए और छात्र जाति, धर्म या सामाजिक-आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना एक-दूसरे से घुल-मिल सकें।
ईमेल में लिखा गया, "आईआईटी बॉम्बे किसी साथी छात्र से यह पूछना गलत मानता है कि वे किस कैटेगरी (जन्म या एडमिशन के समय की कैटेगरी) से हैं। ऐसा पूछने से जान-बूझकर या अनजाने में भेदभाव की भावना पैदा हो सकती है। किसी भी व्यक्ति (छात्र/स्टाफ/फैकल्टी सदस्य) के लिए दूसरे छात्रों से उनकी जी (एडवांस्ड) रैंक/गेट स्कोर या ऐसी कोई भी जानकारी पूछना भी गलत है जिससे उनकी जाति या उससे जुड़ी बातें पता चल सकें।"
इसमें आगे कहा गया, "भले ही सवाल पूछने वाले को यह बात सामान्य लगे और वह सिर्फ उत्सुकता में ऐसा कर रहा हो, लेकिन अक्सर ऐसे सवाल का दूसरे छात्र पर बुरा असर पड़ सकता है। ऐसा पूछना जाति जानने की कोशिश जैसा लग सकता है और इससे भेदभाव की स्थिति बन सकती है।"
'रुचियों के आधार पर करें दोस्ती'
इस मैसेज में छात्रों से यह भी कहा गया कि वे अपने डिपार्टमेंट, स्पोर्ट्स, म्यूजिक, फिल्मों, स्कूलों, कॉलेजों, गांवों, शहरों और हॉबीज जैसी समान रुचियों के आधार पर दोस्ती करें। छात्रों को दिए संदेश में कहा गया, "ऐसे किसी भी मैसेज (जैसे जोक्स) को शेयर या फॉरवर्ड करना मना है जो अपमानजनक, नफरत फैलाने वाले, जातिवादी, लिंग-भेद करने वाले या कट्टरता दिखाने वाले हों (जैसे धर्म या सेक्सुअल ओरिएंटेशन के आधार पर) या जिन्हें परेशान करने या बुली करने (धौंस जमाने) जैसा माना जा सके।"

ईमेल में कहा गया कि यह रोक व्हाट्सएप, फेसबुक और ईमेल पर शेयर किए गए मैसेज के साथ-साथ आमने-सामने की बातचीत पर भी लागू होती है और चेतावनी दी गई कि नियमों का उल्लंघन करने पर कड़ी सजा हो सकती है। यह ईमेल प्रोफेसर डूला के डीन रहते हुए भेजा गया था। उनके कार्यकाल के दौरान आईआईटी बॉम्बे ने भेदभाव-विरोधी गाइडलाइंस भी दो बार जारी की थीं।
क्या है आरोप?
आरोप है कि प्रोफेसर डूला ने 18 सितंबर को परीक्षा हॉल के अंदर वाकोडे को मोबाइल फोन इस्तेमाल करते हुए पकड़ा था। कुछ घंटों बाद 20 साल का यह सेकंड-ईयर का छात्र अपने हॉस्टल के कमरे में मृत पाया गया।
वाकोडे के माता-पिता का आरोप है कि उनके बेटे ने मौत से कुछ दिन पहले जातिसूचक टिप्पणियां किए जाने की शिकायत की थी। इन आरोपों के कारण आईआईटी बॉम्बे कैंपस में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया।
सीसीटीवी फुटेज में क्या?
पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज इकट्ठा किया है जिसमें परीक्षा के दौरान वाकोडे की हरकतें दिख रही हैं, जिसमें उसे कथित तौर पर नकल करते हुए पकड़ा गया था। जांचकर्ताओं के अनुसार, 18 सितंबर के फुटेज में वाकोडे दोपहर 12.30 बजे से 12.45 बजे के बीच परीक्षा हॉल के अंदर दिख रहा है, जब सेमेस्टर परीक्षा खत्म होने वाली थी।
फुटेज में वह कथित तौर पर झुककर अपनी जेब में रखे मोबाइल फ़ोन को देखते हुए दिख रहा है। पुलिस इस आरोप की भी जांच कर रही है कि वह परीक्षा के दौरान सवालों के जवाब देने के लिए चैटजीपीटी का इस्तेमाल कर रहा था। इसके बाद फुटेज में इनविजिलेटर (निरीक्षक) को वाकोडे की हरकतों पर ध्यान देते और उसके पास जाते हुए दिखाया गया है।
इनविजिलेटर उसकी आंसर शीट लेते हुए और उसे एग्जामिनेशन हॉल से बाहर जाने के लिए कहते हुए दिखाई देते हैं। इसके बाद वाकोडे उठते हुए अपना सामान इकट्ठा करते हुए और बाहर जाने की तैयारी करते हुए दिखाई देता है।
