नई दिल्ली। सुरक्षा एजेंसियों को कई दफा चकमा देने वाला आतंकी यासीन भटकल आखिरकार एनआइए के हाथ आ ही गया। देश में तकरीबन 10 बड़ी आतंकी घटनाओं को अंजाम देने वाले यासीन को गिरफ्तार करने के बाद जब गुरुवार को बिहार के मिलिट्री कैंप लाया गया जहां जांच एजेंसियों ने उससे पूछताछ की। इस पूछताछ में उसने कई बड़े राज खोले। उसने कहा कि अभी तो कुछ भी नहीं हुआ है,आगे आगे देखो होता है क्या।

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सूत्रों ने बताया कि एजेंसी ने उसके साथ जब सख्ती बरतने की कोशिश की तो उसने बताया कि आईएसआई कैसे उसकी और उसके भाई की सुरक्षा करती थी। जब उससे उसके गिरोह के बारे में पूछा गया तो उसने बताया कि कराची में इंडियन मुजाहिदीन का मुख्यालय है और वहीं से देश में आतंक फैलाया जाता है।

सूत्रों की माने तो पूछताछ में भटकल ने खुलासा किया कि 2007 से अब तक वो 5 बार पाकिस्तान जा कर आया है। हर बार उसे आईएसआई के बड़े अधिकारियों से मिलाया गया और उन्होंने ही हर बार फंड और भारत में धमाके का ब्लू प्रिंट सौंपा।

इसके साथ ही उसने कहा कि आतंकी घटनाएं तो रोज होती रहती है, इसमें नई बात क्या है। उसने कहा कि अगर वह देश के लिए इतना ही बड़ा दुश्मन है तो उससे पूछताछ के लिए किसी बड़े अधिकारी को ही आना पड़ेगा।

इस दौरान यासीन ने आईएसआई के साथ अपने रिश्ते की बात भी कबूली। उसने बैंगलोर और हैदराबाद में हुए धमाकों की जिम्मेदारी ली। यासीन से पूछताछ के दौरान कुछ ऐसी बातों का खुलासा हुआ है जो बेहद चौंकाने वाली हैं। एनआइए से मिली जानकारी के मुताबिक यासीन ने बताया कि दाऊद और टाइगर मेमन पाकिस्तान में ही रहते हैं।

सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देने में माहिर है यासीन

यासीन साल 2009 के दिसंबर में नकली नोटों के साथ कोलकाता में गिरफ्तार हुआ था। लेकिन उसने अपनी पहचान छिपा ली और कोलकाता पुलिस भी उसे पहचान नहीं पाई। जब तक केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों को उसकी गिरफ्तारी की सूचना मिली वह दो सप्ताह जेल में रहकर जमानत पर रिहा होकर फरार हो चुका था।

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पुलिस सूत्रों के अनुसार यासीन भटकल बेहद शातिर दिमाग का आदमी है। एक बार कोलकाता मे उसने एक पुलिस कांस्टेबल को दीवार पर छपा अपना पोस्टर घूरते देखा तो पुलिसकर्मी के पास जाकर उसने पूछा कि जिस व्यक्ति का पोस्टर लगा है वह कौन है? कांस्टेबल ने बताया कि वह यासीन भटकल नामक एक खूंखार आतंकवादी का पोस्टर है। इतना ही नहीं जब कोलकाता पुलिस ने नकली नोटों के साथ यासीन को पकड़ा तो उसने अपना नाम बुल्ला मलिक बताया था। पुलिस ने उसके बारे में ज्यादा छानबीन की जरूरत महसूस नहीं की थी।

पकड़े जाने का खतरा

स्पेशल सेल की पूछताछ में मोहम्मद इरशाद ने बताया था कि यासीन ने उससे कहा था कि दिल्ली में वारदात को अंजाम देने के लिए वह हथियार या विस्फोटक बाहर से नहीं लाएंगे। क्योंकि इसमें पकड़े जाने का अंदेशा था। इसलिए उसने इरशाद से मीरबाग स्थित उसके प्लाट में अवैध हथियारों की फैक्टरी खोलने को कहा। हथियार बनाने के लिए कारीगर व डाई का इंतजाम भी यासीन ने ही किया था। यही बनी पिस्टल से जामा मस्जिद गोलीकांड को अंजाम दिया गया।

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