मामल्लपुरम, जयप्रकाश रंजन। चेन्नई से 40 किलोमीटर दूर मामल्लपुरम (महाबलीपुरम) में मोदी-शिनफिंग के बीच होने वाली दूसरी अनौपचारिक वार्ता की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। सुरक्षा इंतजाम की वजह से शहर में जिस तरह का सन्नाटा पसरा है वह कुछ वैसा ही है जैसा इस बहुप्रतीक्षित मुलाकात से 24 घंटे पहले भारत व चीन के रिश्तों में पसरा है।

मोदी के दोबारा सत्ता में वापस लौटने के बाद दोनो देशों के विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने इस वार्ता की तैयारी इस सोच से शुरु की थी कि द्विपक्षीय रिश्तों की राह में बड़े रोड़े बने मुद्दों को जड़ से मिटाने की कोशिश हो, लेकिन अब यह साफ हो गया है कि कश्मीर का मुद्दा भारत-चीन के बीच एक नया अड़चन बन रहा है। मोदी और चिनफिंग अगले 48 घंटों में जब तीन दौर में बातचीत करेंगे तो रिश्तों में कश्मीर की वजह से पसरे तनाव को दूर करने के लिए सबसे ज्यादा मशक्कत करेंगे।

अप्रैल, 2018 में हुई थी दोनों की मुलाकात

पीएम नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच यह दूसरी अनौपचारिक बातचीत है। पहली बातचीत अप्रैल, 2018 में वुहान (चीन) में हुई थी। जानकारों की मानें तो वार्ता से ठीक पहले दोनो देशों ने जिस तरह का कूटनीतिक अंदाज दिखाया है उससे साफ हो रहा है कि एक दूसरे पर दबाव बनाने की पूरी कोशिश हो रही है। चिनफिंग के भारत आने से ठीक पहले चीन की तरफ से पाकिस्तान के पीएम इमरान खान को आमंत्रित करना और द्विपक्षीय बातचीत में कश्मीर को लेकर चीन के राष्ट्रपति की तरफ से बेहद आपत्तिजनक बयानबाजी भारत को दबाव में लेने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

भारत के भी बदले तेवर

दूसरी तरफ भारत ने चिनफिंग के बयान की जिस अंदाज में निंदा की है और उसे अपने आतंरिक मामलों में हस्तक्षेप करार दिया है वह भारत के भी बदले तेवर को दर्शाता है। यही वजह है कि वरिष्ठ राजनयिक एम के भद्रकुमार ने कहा है कि, इस बार वुहान स्पि्रट नहीं दिख रही है। देश के प्रख्यात कूटनीतिक विश्लेषक ब्रह्मा चेलानी ने कहा है कि, 'चीन भारत को पाकिस्तान के चश्मे से नहीं देखता बल्कि वह उसे भारत के खिलाफ छद्म तौर पर इस्तेमाल कर रहा है।'

वार्ता को कामयाब बनाने की जबरदस्त कोशिश

इन तनाव भरे क्षण में भी दोनो तरफ के विदेश मंत्रालयों की तरफ से मोदी-चिनफिंग वार्ता को कामयाब बनाने की जबरदस्त कोशिश चल रही है। एक अधिकारी के मुताबिक हालात वुहान वार्ता से पहले जितने खराब थे उतने अब भी नहीं है। तब कुछ ही महीने पहले डोकलाम में दोनो देशो की सेनाएं आमने-सामने कई महीनों तक तैनात रही थीं। इस बार भी बहुत कुछ पोजिटिव है जिसको लेकर दोनो नेता रिश्तों को आगे बढ़ाएंगे। अधिकारियो को उम्मीद है कि मोदी और चिनफिंग के बीच होने वाली मुलाकात के बाद जारी बयान माहौल में आए तनाव को पूरी तरह से खत्म कर देंगे।

मोदी-चिनफिंग मुलाकात पर पाकिस्तान का साया

भारत में चीन के राजदूत ने भी इसी तरह के बयान दिए हैं कि, 'दोनो देशों के बीच सिर्फ सकारात्मक रिश्तों की गुंजाइश है, इसके लिए मिलजुल कर शांति बनाने की कोशिश की जाएगी।' माहौल को सकारात्मक बनाने के इन बयानों के बावजूद इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि मोदी और चिनफिंग मुलाकात पर पाकिस्तान व कश्मीर का साया पड़ चुका है। भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि मोदी अपनी तरफ से कश्मीर का मुद्दा नहीं उठाएंगे लेकिन अगर चीन की तरफ से इसे उठाया जाता है तो उन्हें हालात से अवगत कराने की पूरी तैयारी है।

जबरदस्त होगी चिनफिंग की आगवानी

उधर, विदेश मंत्रालय और तमिलनाडु सरकार की तरफ से चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग की आगवानी में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। चीन के राष्ट्रपति और उनके साथ आये दल को भारत व चीन के बेहद पुराने रिश्तों को महाबलीपुरम स्थित तीन अहम ऐतिहासिक स्थलों के जरिए पेश किया जाएगा। ये स्थल हैं अर्जुन की तपस्या, पांच रथ, समुद्र किनारे स्थित मंदिर। मोदी शुकुवार शाम को चिनफिंग को लेकर तकरीबन 1300 वर्ष पूर्व पहाड़ों को काट कर बनाये गये गुफाओं और भित्त चित्रों के दर्शन कराएंगे। देर शाम एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन रखा गया है जो भारत व चीन के रिश्तों को दिखाएगा। सनद रहे कि इस शहर से ही चीन में बौद्ध धर्म के विस्तार की शुरुआत हुई थी। यह शहर चीन के कारोबार का एक बड़ा केंद्र था जिसके जरिए चीनी व्यापारी समूचे दक्षिण भारत में कारोबार करते थे।

चिनफिंग की नेपाल यात्रा पर भी होगी नजर

चिनफिंग भारत की यात्रा पूरी करके नेपाल रवाना होंगे और वहां उनकी तरफ से होने वाली घोषणाओं पर भारत की पैनी नजर होगी। हाल के वषरें में चीन के किसी राष्ट्रपति की यह पहली नेपाल यात्रा है। यह यात्रा तब हो रही है जब नेपाल में एक स्थाई सरकार बन चुकी है जो चीन के साथ रिश्तों को प्रगाढ़ करने की इच्छा लगातार जताती रही है। चीन ने पहले नेपाल को सड़क व रेलमार्ग से जोड़ने का एलान किया था और अब माना जा रहा है कि चिनफिंग की यात्रा के दौरान योजना को आगे बढ़ाने की घोषणा होगी। अगर इस तरह की घोषणा होती है तो यह भारत के लिए भी चिंता की बात होगी। नेपाल को सड़क व रेल मार्ग से जोड़ कर चीन उत्तरी भारत के एक बड़े हिस्से के करीब आ सकता है।

Posted By: Manish Pandey

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