जागरण संवाददाता, जयपुर। भारत और फ्रांस के वायुसैनिक बुधवार से जोधपुर में युद्धाभ्यास करेंगे। 'डेजर्ट नाइट' युद्धाभ्यास के लिए भारतीय वायुसेना का सामान लेकर माल वाहक विमाल ग्लाब मास्टर जोधपुर पहुंच गया है। इसके साथ ही दोनों देशों के वायुसैनिक भी पहुंच गए हैं। 24 जनवरी तक चलने वाले युद्धाभ्यास के लिए जोधपुर एयरबेस तैयार है। फ्रांस के फाइटर्स विमान के साथ 175 वायुसैनिक इस युद्धाभ्यास में शामिल होंगे। भारतीय वायुसैनिक सुखोई, मिराज व राफेल के साथ अपना कौशल दिखाएंगे। इस युद्धाभ्यास में सबकी निगाह पिछले साल एयरफोर्स में शामिल किए गए राफेल पर टिकी हैं।

'डेजर्ट नाइट' युद्धाभ्यास को राफेल की परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा

यह पहला मौका होगा जब देश में किसी युद्धाभ्यास में राफेल शामिल होगा। इस युद्धाभ्यास को राफेल की परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है । इस युद्धाभ्यास को दो साल पहले भारत और फ्रांस के बीच हुए 'गरुड़' से अलग माना जा रहा है। इसमें फ्रांस के राफेल के साथ ही मल्टी रोल टैंकर एयर बस ए-330, टेक्टिकल ट्रांसपोर्ट विमान ए-400 और 175 शामिल होंगे।

भारत की ओर से मिराज-2000, सुखोई-30 एमकेआइ, राफेल विमान हिस्सा लेंगे

भारत की तरफ से मिराज-2000, सुखोई, राफेल, फ्लाइट रिफ्यू¨लग टैंकर आईएल-78,अवाक्स सहित अन्य विमान शामिल होंगे। उल्लेखनीय है कि 2014 में भारत और फ्रांस वायुसेना के संयुक्त युद्धाभ्यास में राफेल अपनी ताकत दिखा चुका है। उस दौरान राफेल व सुखाई के बीच रोमांचक मुकाबला हुआ था। तत्कालीन एयरचीफ मार्शल अरुप राहा ने सबसे पहले जोधपुर में ही राफेल उड़ाकर परीक्षण किया था। इसके बाद ही राफेल के सौदे की प्रक्रिया आगे बढ़ी थी। गौरतलब है कि भारत ने फ्रांस से ही राफेल खरीदे हैं।

फ्रांसीसी वायुसेना के साथ पांच दिवसीय युद्धाभ्यास 

राजस्थान में जोधपुर के नजदीक बुधवार से फ्रांसीसी वायुसेना के साथ शुरू हो रहे पांच दिवसीय युद्धाभ्यास में भारतीय वायुसेना भी राफेल विमान उतारेगी। इस तरह दोनों ओर से राफेल विमान हिस्सा लेंगे। वायुसेना ने बताया कि 'एक्स-डेजर्ट नाइट-21' में फ्रांस की ओर से राफेल, एयरबस ए-330 मल्टी-रोल टैंकर ट्रांसपोर्ट (एमआरटीटी), ए-400एम टेक्टिकल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट हिस्सा लेंगे। जबकि अभ्यास में फ्रांस के करीब 175 वायुसेना कर्मी भाग लेंगे।

अनोखा युद्धाभ्यास: दोनों पक्षों की ओर से राफेल

वायुसेना की ओर से जारी बयान के मुताबिक, 'यह युद्धाभ्यास अनोखा है क्योंकि इसमें दोनों पक्षों की ओर से राफेल विमानों को उतारा जा रहा है। यह दो प्रमुख वायुसेनाओं के बीच बढ़ते संवाद का संकेत है।'

पिछला अभ्यास 2019 में फ्रांस में हुआ था

यह युद्धाभ्यास ऐसे समय हो रहा है जब पूर्वी लद्दाख में चीन-भारत सीमा विवाद के मद्देनजर भारतीय वायुसेना देशभर में अपने अग्रिम मोर्चो के ठिकानों को युद्धक तैयारियों के उच्च स्तर पर रख रही है। बता दें कि भारत और फ्रांस की वायुसेनाएं कई वर्षो से 'गरुड़' अभ्यास करती रही हैं और पिछला अभ्यास 2019 में फ्रांस में हुआ था। 

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