नेशनल डेस्क, नई दिल्ली। वैज्ञानिक काफी समय से चूहों, सुअरों, बकरियों, मुर्गियों और तितलियों के जीन्स में बदलाव करते रहे हैं, लेकिन जीन एडिटिंग के महत्वपूर्ण तरीके क्रिस्पर तकनीक से अभी तक रेप्टाइल (सरीसृप) की जीन एडिटिंग नहीं की जा सकी थी। अब वैज्ञानिकों ने असंभव सा लगने वाला जेनेटिक परिवर्तन कर दिखाया है। वैज्ञानिकों ने एक छिपकली के जीन में बदलाव किया है। जीन में बदलाव की वजह से लगभग पारदर्शी दिखने वाली एनोलिस लिजार्ड सामने आई है। यह दुनिया में जीन में बदलाव से जन्मा पहला रेप्टाइल है।

अमेरिका की जार्जिया यूनिवर्सिटी की ग्रेजुएट स्टूडेंट एशले रेसिस, जो कि छिपकली की जीन एडिटिंग कार्य से जुड़ी हुई हैं, बताती हैं कि जब छिपकली अंडा फोड़कर बाहर निकली तो हम सब लोग अचंभित रह गए। उन्होंने बताया कि हमने पहली ऐसी लिजार्ड पैदा करने के बारे में वाकई नहीं सोचा था।

यूनिवर्सिटी के जेनेटिक्स विभाग के डायरेक्टर डगलस मेंके ने बताया कि अपने काम के जरिए अब हम और म्यूटेंट छिपकली बना सकते हैं। मानव बायोलॉजी का अध्ययन करने में इस तरह के मॉडल का उपयोग हो सकेगा। उन्होंने बताया, अब तक रेप्टाइल्स की सभी दस हजार प्रजातियां ऐसी रिसर्च के

दायरे से बाहर थीं। वैज्ञानिक सोचते थे कि ऐसा करना बहुत मुश्किल होगा, लेकिन यह संभव हो गया है। साइंस मैगजीन में प्रकाशित पेपर में छिपकली पैदा करने का ब्योरा दिया गया है।

Posted By: Sanjay Pokhriyal

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप