नई दिल्‍ली, जेएनएन। विश्‍व में हर साल 11 जुलाई को 'जनसंख्‍या दिवस' मनाया जाता है। इसका मकसद वातावरण और विकास के संदर्भ में जनसंख्या से जुड़े मुद्दों पर जागरुकता फैलाना है। लेकिन क्‍या इस दिन को मनाने का मकसद पूरा हो रहा है? हर सेकंड बढ़ रही आबादी को लेकर भारत में गंभीर चिंतन क्‍यों नहीं होता? बढ़ती आबादी के कारण प्राकृतिक संसाधन घट रहे हैं, आखिर क्‍या हम सबकुछ खत्‍म होने का इंतजार कर रहे? सिर्फ हम भारत की बात करें तो अगर यहां जनसंख्या की दर कम करने के लिए जल्दी ही कुछ ठोस कदम नहीं उठाए गए तो 2030 तक भारत विश्व का सबसे बड़ी आबादी वाला देश कहलाएगा। अगर ऐसा ही चलता रहा, तो कहीं बढ़ती आबादी के बोझ तले ना दब जाए धरती...!

भारत युवाओं का देश है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार 'युवा शक्ति' को देश की तरक्‍की से जोड़कर देखते हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि युवाओं के दम पर देश की अर्थव्‍यवस्‍था आगे बढ़ रही है। लेकिन बढ़ती जनसंख्‍या विकराल रूप धारण कर चुकी है, जिसके परिणाम भविष्‍य में हमको उठाने पड़ेंगे। शायद इसीलिए परिवार नियोजन की ओर भी अब सरकार का ध्‍यान गया है।

760 करोड़ पहुंच गई विश्‍व की जनसंख्‍या

इस साल विश्‍व जनसंख्‍या दिवस का थीम है- परिवार नियोजन हर मनुष्‍य का अधिकार। तेजी से बढ़ती दुनिया की आबादी ने हमारे सामने कई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। दुनिया की आबादी 760 करोड़ पहुंच गई है जो हर सेकंड बढ़ती जा रही है। आज विश्‍व के ज्‍यादातर देशों में लोग भोजप, शिक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य सहित कई मूलभूत सुविधाओं से बेहद दूर हैं। इसकी एक मुख्‍य वजह तेजी से बढ़ती जनसंख्‍या है। परिवार नियोजन की महत्ता को समझते हुए भारत में अब सीमित परिवार पर जोर दिया जा रहा है। बढ़ती आबादी हर देश के विकास में सबसे बड़ा रोड़ा है। लेकिन भारत में परिवार नियोजन पर जिस स्‍तर पर काम हो रहा है, वो संतोषजनक नजर नहीं आता है।

परिवार नियोजन की जरूरत

यूनाइटेड नेशंस पॉपुलेशन फंड ऐक्टिविटीज (यूएनएफपीए) के मुताबिक परिवार नियोजन से न केवल वर्तमान, बल्कि भविष्य भी संवरता है। भारत सरकार इन दिनों परिवार नियोजन को लेकर काफी प्रचार कर रही है। परिवार नियोजन से जनसंख्‍या पर तो नियंत्रण होता ही है, साथ ही महिलाओं के स्‍वास्‍थ्‍य और देश की अर्थव्‍यवस्‍था पर भी सकारात्‍मक प्रभाव पड़ता है। यूएनएफपीए का कहना है कि दुनिया के विकासशील देशों में एक अनुमान के मुताबिक 214 मिलियन महिलाएं ऐसी हैं, जिनकी आधुनिक गर्भनिरोधों की जरूरत अभी तक पूरी नहीं हो पाई हैं।

विश्व की जनसंख्या 5 अरब पार होने पर हुई जनसंख्‍या दिवस की शुरुआत

पहली बार 11 जुलाई 1989 में यूएन की गवर्निंग काउंसिल ने 11 जुलाई को दुनिया में जनसंख्या दिवस मनाने का फैसला किया। विश्व जनसंख्या दिवस वर्ष 1987 से मनाया जा रहा है। 11 जुलाई 1987 में विश्व की जनसंख्या 5 अरब को पार कर गई थी। तब संयुक्त राष्ट्र ने जनसंख्या वृद्धि को लेकर दुनिया भर में जागरूकता फैलाने के लिए यह दिवस मनाने का निर्णय लिया। भारत सहित दुनिया भर के देश अपनी जनसंख्या नियंत्रण को लेकर जागरूकता को बल दे रहा हैं। भारत जनसंख्या वृद्धि में विश्व के कई देशों से बहुत आगे पहुंच गई है। बढ़ती जनसंख्या भारत के लिए ¨चता का विषय बना है। जनसंख्या नियंत्रण में हरेक नागरिक के सहयोग की जरूरत है।

आपातकाल में जबरन नसबंदी अभियान

यह हैरानी की बात है कि करीब चार दशक पहले बढ़ती जनसंख्या तो एक मुद्दा थी, लेकिन आपातकाल में जबरन नसबंदी अभियान के बाद राजनीतिक दलों एवं अन्य नीति-नियंताओं के एजेंडे से यह मसला ऐसे बाहर हुआ कि फिर किसी ने उसकी सुध नहीं ली। क्या यह अजीब नहीं कि 43 साल पहले 1975 में जब भारत की आबादी 55-56 करोड़ थी तब तो बढ़ती जनसंख्या एक गंभीर मसला थी, लेकिन आज जब वह बढ़कर 130 करोड़ से अधिक हो गई है तब कोई भी उसके बारे में न तो चर्चा करता है और न ही चिंता?

 

भारत में जनसंख्‍या बढ़ने का कारण

भारत की जनसंख्या बढ़ने का प्रमुख कारण अशिक्षा है। इसके अलावा अशिक्षा, स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का अभाव और अंधविश्वास भी जनसंख्या बढ़ने के कारण हैं। इस‍की वजह से भारत में संसाधनों का अभाव हो रहा है, भूख और कुपोषण बढ़ रहा है। आपको जानकर हैरत होगी कि विश्व में बीमारियों का जो बोझ है, उसमें से 20 प्रतिशत केवल भारत का है। बढ़ती आबादी के कारण प्राकृतिक चीजें घट रही हैं, सुविधाओं का अभाव हो रहा है। बेरोजगारी में इजाफा हो रहा है।

नाइजीरिया में तेजी बढ़ रही जनसंख्‍या

भारत की ही तरह नाइजीरिया में भी जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है। अगर नाइजीरिया की जनसंख्‍या वृद्धि की रफ्तार में ब्रेक नहीं लगा तो साल 2050 तक ये जनसंख्या के मामले में अमेरिका से आगे निकल जाएगा यानी की नंबर तीन पर पहुंच जाएगा। नाइजीरिया अभी विश्‍व के अधिकतम जनसंख्‍या वाले देशों की सूची में सातवें नंबर पर है। अच्‍छी बात ये है कि इस वक्त यूरोप की जनसंख्या में कमी आई है, क्योंकि यहां की प्रजनन क्षमता में गिरावट दर्ज की गई है।

जनसंख्या से जुड़ीं खास बातें

- यूनाइटेड नेशन्स जनरल असेंबली ने 1989 में 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस घोषित किया था। इसका मकसद वातावरण और विकास के संदर्भ में जनसंख्या से जुड़े मुद्दों पर जागरुकता फैलाना था।

- 1000 AD में पूरे विश्व की जनसंख्या 40 करोड़ थी। 1804 में पहली बार ये आंकड़ा एक बिलियन यानि एक अरब के पार पहुंच गई, जबकि करीब 100 साल बाद विश्व की जनसंख्या 3 अरब के पार हो गई। 1960 से 2000 तक यानि 40 वर्षों में विश्व की जनसंख्या दोगुनी यानि 6 अरब हो गई। जुलाई 2017 के आंकड़ों के मुताबिक विश्व की आबादी 7.5 अरब है।

- हर सेकेंड में पूरी दुनिया में चार बच्चों का जन्म होता है। यानि एक मिनट में 240 बच्चों का जन्म। जबकि एक सेकेंड में 1.8 करीब दो लोगों की मौत होती है। एक अनुमान के मुताबिक वर्ष 2050 आते आते दुनियाभर की 70 फीसद आबादी शहरों में रहने लगेगी।

- जनसंख्या के मामले में भारत इस वक्त दुनियाभर में दूसरे नंबर पर और चीन पहले नंबर पर है। लेकिन एक अनुमान के मुताबिक 2025 से 2030 तक भारत की जनसंख्या चीन से आगे निकल जाएगी।

- विश्व की जनसंख्या के करीब 180 करोड़ लोग 10 से 24 साल की आयु के बीच के हैं। इतना ही नहीं दुनिया की 52 फीसद से ज्यादा जनसंख्या 30 साल से कम उम्र की है।

- अगर फेसबुक कोई देश होता तो जनसंख्या के मामले में ये चीन और भारत के बाद तीसरे नंबर पर होता। फेसबुक पर हर महीने लॉग इन करने वालों का संख्या 139 करोड़ है।

Posted By: Tilak Raj