नई दिल्ली, पीटीआई। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को कहा कि स्वदेशी प्रौद्योगिकी का उपयोग कर कोयले से मेथनाल बनाने के लिए संयंत्र लगाने को लेकर काम प्रगति पर है। केंद्रीय मंत्री ने यहां ब्रह्मपुत्र नदी में मेथनाल युक्त डीजल (एमडी15) से चलने वाले अंतर्देशीय जहाज के परीक्षण का उद्घाटन करते हुए कहा कि भेल (हैदराबाद और त्रिची), थर्मेक्स और आईआईटी दिल्ली परियोजना पर काम कर रहे हैं।

मेथनाल एक लागत प्रभावी वैकल्पिक समुद्री ईंधन: पुरी

पुरी ने कहा कि मेथनाल एक लागत प्रभावी वैकल्पिक समुद्री ईंधन है। यह अन्य समुद्री ईंधनों की तुलना में कम खर्चीला है और तट के किनारे भंडारण जैसे बुनियादी ढांचे के विकास के मामले में किफायती है। पुरी ने भारतीय ऊर्जा सप्ताह-2023 की तैयारियों के सिलसिले में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि असम पेट्रोकेमिकल लिमिटेड (एपीएल) फिलहाल करीब 100 टीपीडी (टन प्रति दिन) का उत्पादन कर रही है और 500 टीपीडी मेथनाल उत्पादन के लिए नई परियोजनाओं पर काम कर रही है।

दरअसल, मेथनाल पर चलने वाले जहाजों में जरूरी बदलाव की लागत अन्य वैकल्पिक ईंधन की तुलना में काफी कम है। साथ ही मेथनाल के रखरखाव के लिए मौजूदा भंडारण सुविधा के लिए केवल मामूली संशोधन की आवश्यकता पड़ती है। पेट्रोल में 15 प्रतिशत मेथनाल के सम्मिश्रण से पेट्रोल/कच्चे तेल के आयात में कम से कम 15 प्रतिशत की कमी हो सकती है। साथ ही इससे ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन 20 प्रतिशत तक घट सकता है।

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Edited By: Shashank Mishra

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