क्या बंगाल चुनाव से पहले आने वाला है महिला आरक्षण बिल? सरकार ने दे दिया बड़ा हिंट
सरकार ने महिला आरक्षण बिल 2029 से लागू करने की मंशा जताई है, जिसके लिए विशेष सत्र बुलाने की योजना ...और पढ़ें

(फोटो-राज्यसभा)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सरकार की ओर से पहले ही राजनीतिक दलों को सूचित किया जा चुका है कि महिला आरक्षण 2029 से ही लागू करने के लिए विधेयक लाने की मंशा है। ऐसे में वर्तमान बजट सत्र की पूर्व घोषणा के अनुसार गुरुवार को आखिरी दिन आशंकित कांग्रेस ने बार-बार राज्य सभा में सरकार से पूछा कि सदन चलाने को लेकर क्या योजना है?
फिर जैसे ही संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजीजू ने बताया कि गुरुवार को सूचीबद्ध दो विधेयक पारित कराने के बाद सदन स्थगित कर दिया जाएगा और एक निश्चित उद्देश्य (महिला आरक्षण बिल) के लिए दो-तीन सप्ताह बाद सदन की बैठक बुलाने की योजना है। इतना कहते ही विपक्ष बिफर गया और तीखी तकरार से संसद का पारा चढ़ गया।
सरकार तय करेगी सदन कब बुलाना है
विपक्षी खेमे से विशेष रूप से कांग्रेस ने आरोप लगाया कि चुनावों से पहले यह विधेयक लाकर सरकार श्रेय लेना चाहती है। इस पर नेता सदन जेपी नड्डा ने जब कहा कि सरकार अपने ढंग से निर्णय करेगी।
सदन कब बुलाना है, यह सरकार तय करेगी। इस पर नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे बिफर पड़े और मेज पीटते हुए बोले कि देश और संसद दबंगई नहीं सहेगी।
राज्य सभा में शून्यकाल के आरंभ में कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने सदन चलाने या स्थगित करने को लेकर सरकार से योजना स्पष्ट करने की मांग की, जिस पर जेपी नड्डा ने थोड़ी देर में स्थिति स्पष्ट करने का आश्वासन पीठ को दे दिया।
फिर प्रश्नकाल पूरा होने पर सभापति सीपी राधाकृष्णन ने जैसे ही आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) बिल प्रस्तुत करने के लिए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय का नाम पुकारा, वैसे ही जयराम रमेश फिर खड़े हो गए और स्थिति स्पष्ट करने की मांग दोहराई।
एक निश्चित उद्देश्य के लिए चलाई जाएगी कार्यवाही
इस पर किरेन रिजीजू ने बताया कि आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) बिल और जन विश्वास बिल लिए जाएंगे। उसके बाद दो-तीन सप्ताह के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित करने का अनुरोध किया जाएगा।
उन्होंने बताया दो-तीन सप्ताह के बाद एक निश्चित उद्देश्य के लिए कार्यवाही चलाई जाएगी, जिसकी चर्चा विपक्ष के 80 प्रतिशत दलों के साथ हो चुकी है।
जयराम ने आपत्ति जताते हुए चुनावों के बाद यानी 29 अप्रैल के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की। साथ ही कहा कि उससे पहले महिला आरक्षण विधेयक लाया गया तो यह चुनाव आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन होगा।
समय सीमा में बंधे होने का दावा करते हुए संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि आम चुनाव 2029 में होने हैं और सरकार महिलाओं को लोकसभा और विधान सभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए प्रतिबद्ध है। सभी दलों से सहयोग का आग्रह करते हुए कहा कि यह राजनीति का विषय नहीं है।
महिला आरक्षण बिल की टाइमिंग पर सवाल
रिजीजू की बात से असहमति जताते हुए नेता प्रतिपक्ष खरगे ने कहा कि उन्होंने पत्र लिखा था कि इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए। महिला आरक्षण का विरोधी कोई नहीं है। दावा किया कि हम ही पहले लोग हैं, जो महिला आरक्षण विधेयक लाए थे। यह खेल बंद करो कि इसे कब लाना है।
आपको लाना ही था तो इसी सत्र में पहले ले आते। उन्होंने पीएम मोदी और रिजीजू को लेकर भी टिप्पणियां कीं। इस पर नड्डा ने दो टूक जवाब दिया कि सरकार निर्णय लेने में सक्षम है कि विधेयक कब लाना है।
आप समझ नहीं रहे हैं कि जिस विधेयक को आप 30 साल में पारित नहीं करा पाए, उसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दो दिन में पारित करा दिया। साथ ही कहा कि जहां तक श्रेय लेने की बात है तो श्रेय तो सरकार पहले ही ले चुकी है।
