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Women Reservation Bill लोकसभा में 54 वोट से गिरा, सदन के बाहर NDA की महिला सांसदों ने किया प्रदर्शन

By Jitendra SharmaEdited By: Garima Singh
Published: Fri, 17 Apr 2026 08:26 PM (IST)Updated: Fri, 17 Apr 2026 11:05 PM (IST)

लोकसभा में नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक (महिला आरक्षण बिल) दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण गिर गया। कुल 528 ...और पढ़ें

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जितेंद्र शर्मा, नई दिल्ली। लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 2029 के चुनाव से ही महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए सरकार द्वारा लाए गए नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक (131वां संविधान संशोधन विधेयक) और परिसीमन विधेयक सहित तीनों विधेयक दो तिहाई बहुमत नहीं मिल पाने के कारण गिर गए।

इन विधेयकों को पारित कराने के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने जब मत विभाजन कराया तो कुल 528 वोट पड़े। इनमें समर्थन में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े।

परिणाम से स्पष्ट है कि महिला आरक्षण से कहीं अधिक परिसीमन को लेकर चिंता जता रहा विपक्ष प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आश्वासन के बावजूद अपने विरोध से पीछे हटने को तैयार नहीं हुआ।

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महिला आरक्षण बिल लोकसभा में पारित नहीं हो सका

सरकार की ओर से यह समझाने की कोशिश हुई कि सीटें बढ़ेंगी तभी महिलाओं के लिए आरक्षण सही तरह से लागू हो सकेगा और सभी राज्यों में समान रूप से 50 प्रतिशत सीटें भी बढ़ेंगी।

शाह की ओर से शुक्रवार को यह तक कहा गया कि वह लिखित रूप में संशोधित विधेयक के अंदर भी इसे शामिल करने को तैयार हैं। इस आश्वासन से दक्षिण के नेताओं में यह भरोसा जगता दिखा कि उनके राज्यों में सीटें बढ़ेंगी। लेकिन विपक्ष ने यह कहते हुए परिसीमन का विरोध किया कि इसकी आड़ में सीटों की संरचना में हेरफेर होगा।

विपक्ष की मंशा भांपकर प्रधानमंत्री ने पहले ही इस नैरेटिव की नींव रख दी थी कि विधेयक का विरोध करने वाले महिला विरोधी होंगे और देश की नारी शक्ति उनकी नीयत देखेगी। शुक्रवार को पोस्ट कर उन्होंने सभी सदस्यों से स्वविवेक से वोट करने की अपली भी की थी।

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विधेयक को दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल पाया

दो दिनों तक चली लंबी चर्चा के बाद मत विभाजन में मोदी सरकार की ओर से प्रस्तुत विधेयक दो तिहाई बहुमत के अभाव में गिर गया। परिणाम घोषित होते ही विपक्षी खेमे ने मेजें थपथपाकर प्रसन्नता व्यक्त की।

इसके साथ ही पूर्व में हुए प्रयासों की तरह महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण की राह में राजनीतिक दलों के स्वार्थ और राजनीति फिर आड़े आ गई। जैसे ही 131वां संविधान संशोधन विधेयक गिरा, वैसे ही सत्ता पक्ष ने विपक्ष को महिला विरोधी साबित करने की कोशिश की।

'कांग्रेस के कारण महिलाओं को न्याय मिलने में देर होगी'

सदन के बाहर भाजपा नेताओं ने सीधा आरोप लगाया कि कांग्रेस के कारण महिलाओं को न्याय मिलने में देर होगी। सदन के बाहर राजग की महिला सांसदों ने काली तख्ती लेकर कांग्रेस को कठघरे में खड़़ा किया।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने सदन में ही कह दिया कि हम सभी के पास महिलाओं को आरक्षण देने के ऐतिहासिक विधेयक को पारित करने का अवसर था, लेकिन विपक्ष ने साथ नहीं दिया। माना जा रहा है कि यह चुनाव में बड़ा मुद्दा बनेगा।

संभवत: हर राज्य में राजग की ओर से यह बताया जाएगा कि कांग्रेस और विपक्षी दलों ने महिलाओं के जल्द आरक्षण में पेंच फंसाया।

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