बुलंदशहर [जासं]। जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन भले ही कुछ कहे, मगर राष्ट्रीय महिला आयोग ने मान लिया है कि हाकिम की हत्या ऑनर किलिंग ही है। केंद्र सरकार को भेजी गई रिपोर्ट में आयोग ने जिला प्रशासन व पुलिस के खिलाफ सख्त कार्रवाई की संस्तुति भी की है।

22 नवंबर को हाकिम की हत्या के बाद 27 नवंबर को राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्या समीना सैफी ने भाटगढ़ी का दौरा किया था। उस वक्त पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने ऑनर किलिंग के सवाल को टाल दिया था और कहा था कि रिपोर्ट तैयार होने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा।

सूत्रों के मुताबिक समीना सैफी ने आयोग को जो रिपोर्ट दी, उसके आधार पर आयोग न केंद्र को रिपोर्ट भेज दी है। रिपोर्ट में हाकिम हत्याकांड को न केवल ऑनर किलिंग माना गया है, बल्कि आने वाले समय में इस केस को नजीर मानते हुए कुछ सुझाव भी पेश किए हैं। समीना सैफी की रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि जब वह मौके पर गई तो पीड़िता महविश की सुरक्षा में बिना डंडे की दो महिला सिपाही तैनात थी। रिपोर्ट में डीएम द्वारा भाटगढ़ी का दौरा न करने का जिक्र भी है। इस आधार पर उन्होंने माना है कि जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन इस घटना को लेकर बेहद लापरवाह रहा।

आयोग की सिफारिशें

-लड़की के घर से भागने के मामलों में लड़के व उसके परिजनों के खिलाफ तब तक मुकदमा दर्ज न हो, जब तक कि लड़की बरामद न हो जाए और अदालत में बयान न दे दे। या एक निश्चित समय सीमा के अंदर लड़की अगर कोर्ट में पेश न हो तो मुकदमा दर्ज हो। सिफारिश यह भी है कि ऐसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट के डायरेक्शन का पूरी तरह से पालन हो।

-अगर घर से भागे प्रेमी युगल ऑनर किलिंग की आशंका जताते हुए सुरक्षा की मांग करें तो उन्हें हर हाल में सुरक्षा दी जाए।

-ऑनर किलिंग जैसी घटनाएं न हों, इसलिए पुलिस को संवेदनशील बनाया जाए ताकि वह प्रेमी युगलों के दर्द को जान सके, न कि इनका उपहास उड़ाया जाए।

-जिला प्रशासन या पुलिस प्रशासन अगर ऑनर किलिंग जैसी घटनाओं को दबाने की कोशिश करता है, उन्हें भी जांच के दायरे में लाया जाए।

यूपी पुलिस से उठा विश्वास

बुलंदशहर। ऑनर किलिंग की भेंट चढ़े हाकिम की पत्नी महविश को अब यूपी पुलिस पर विश्वास नहीं रहा। महविश ने मांग की है कि उसके पति की हत्या की जांच हाईकोर्ट के जज या किसी रिटायर्ड जज से कराई जाए। पत्रकारों से बात करते हुए महविश ने कहा कि उसके पति की हत्या को पंद्रह दिन बीत चुके हैं। उसके लगातार चीखने चिल्लाने के बावजूद जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन इसे ऑनर किलिंग मानने को तैयार नहीं है। उसे शक है कि पुलिस आरोपियों के दबाव में काम कर रही है।

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